Thursday, 5 November 2026

मूल्यों से महानता तक: टाटा की प्रेरक विरासत - अंशिका वर्मा

आज की GSA कक्षा में हमें एक स्कूल टीचर के यादगार पत्र और टाटा स्कॉलर्स लीग की कहानी सुनाई गई। बात वर्ष 1965 की है। जे.आर.डी. टाटा को कोलकाता के एक स्कूल शिक्षक, भंसाली जी का पत्र मिला। उस समय जे.आर.डी. टाटा 61 वर्ष के थे और उन्हें टाटा समूह के चेयरमैन का कार्यभार संभालने के 27 वर्ष हो चुके थे।

वे स्वयं को कोई असाधारण व्यक्ति नहीं मानते थे। उनका मानना था कि काम छोटा हो या बड़ा, किसी भी काम या व्यक्ति को कम महत्त्व नहीं देना चाहिए।

उनके पाँच प्रमुख सिद्धांत थे—परिश्रम, विचारशीलता, गुणवत्ता, नैतिक आचरण और अच्छे मानवीय संबंध। उनके जीवन में देशभक्ति का भी विशेष स्थान था।

टाटा स्कॉलर्स की सूची में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जीवराज मेहता भी शामिल हैं। वे देश के विकास और भविष्य के बारे में विभिन्न आयामों से चिंतन करते थे। उनके लिए 'नेशन फर्स्ट' अर्थात् देश सबसे पहले था।

धन्यवाद।

अंशिका वर्मा
कक्षा 8
सनबीम ग्रामीण स्कूल

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