Monday, 14 September 2026

GSA Internships and Fellowships

Internships and Fellowships play a vital role in experiential learning and professional development. The initiatives outlined by the Good Schools Alliance show how real-life, hands-on experiences help individuals build the confidence, capabilities, and life skills needed to succeed beyond the classroom.

Comparative Chart: Internships vs. Fellowships

Feature

Internships

Fellowships

Primary Target Audience

Students and young learners (e.g., teaching, counselling, marketing).

Educators, teachers, or advanced practitioners.

Primary Goal

Skill acquisition, career exploration, and operational exposure.

Leadership development, deep thematic focus, and community impact.

Structure & Duration

Short-to-medium term; practical, hands-on execution.

Often cohort-based, reflective retreats, or extended commitments.

Core Outcome

Direct work experience, tactical skills, and workplace readiness.

Strategic leadership, reflective practices, and domain mastery.


Key Similarities

Despite differences in target audience and depth, internships and fellowships share fundamental educational principles:

  1. Experiential Learning (“Learning by Doing “): Both go beyond theoretical textbooks to immerse participants in real-world scenarios.
  2. Mentorship & Collaborative Spaces: Both foster environments where participants discuss, share reflections, and learn alongside peers and leaders.
  3. Focus on Holistic Growth: Neither limits itself to simple task execution; both focus on building character, confidence, and critical thinking.
  4. Community Engagement: Both contribute directly to community initiatives, school ecosystem development, and special projects.

Engaging Individuals with Real-Life Experience & Essential Skills

Based on frameworks promoted on SchoolEducation.com (such as the 3R4S, and 6C learning models), engaging individuals to empower them for work and life involves several strategies:

1. Implement the Core Learning Frameworks

  • The 3Rs (Reading, Reflection, Relationship): Hold regular reflection sessions. Reflection transforms everyday activities into meaningful learning opportunities.
  • The 4Ss (Service, Skill, Sport, Study): Maintain a balanced focus across practical work skills, physical well-being, continuous learning, and community service.
  • The 6Cs (Critical Thinking, Creativity, Collaboration, Communication, Character, Curiosity): Design tasks that require individuals to work in teams, solve open-ended problems, and clearly articulate their ideas.

2. Assign Ownership and Real Responsibilities

Provide real-life responsibilities rather than administrative tasks. Let young people manage project portals, participate in counselling or teaching initiatives, or facilitate group discussions to build agency and leadership early on.


3. Establish Structured Reflection Spaces

Set up regular reflection forums (such as retreat-style discussions or group debriefs) where participants unpack what worked, what failed, and how they can adapt. Experiencing manageable challenges and reflecting on outcomes builds long-term resilience and emotional maturity.

Saturday, 12 September 2026

प्रेरणा, ज्ञान और राष्ट्र निर्माण - सनबीम ग्रामीण स्कूल

“What You Are Looking For Is in the Library” – Reflection
अध्याय को पढ़कर मुझे महसूस हुआ कि पुस्तकालय केवल किताबों की जगह नहीं, बल्कि अपने भीतर कुछ नया खोजने की जगह भी है। इस अध्याय में शिक्षा, ज्ञान, सपनों, रिश्तों और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को बहुत सुंदर तरीके से जोड़ा गया है। हमारे जीवन की समस्याएँ, उलझनें और प्रश्नों के उत्तर हमें अक्सर पुस्तकालय में ही मिल जाते हैं, जो हमारे जीवन की दिशा को भी बदल सकते हैं।

जमशेदजी टाटा द्वारा स्वामी विवेकानंद को लिखा गया पत्र मुझे विशेष रूप से प्रेरित करता है। भारत में विज्ञान और उच्च शिक्षा के लिए एक अच्छे संस्थान की कल्पना करना यह दिखाता है कि एक व्यक्ति का बड़ा सपना पूरे देश के भविष्य को बदल सकता है। इससे मुझे समझ आया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या नौकरी पाना नहीं, बल्कि ज्ञान के माध्यम से समाज और देश को आगे बढ़ाना भी है।

अध्याय के दूसरे हिस्से ने मुझे एक अलग तरह से प्रभावित किया। इसमें छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूँढ़ने, किसी अपने की पसंद को समझने और उसके लिए छोटी-सी खुशी तैयार करने की भावना दिखाई देती है। इससे मुझे लगा कि हम अक्सर जीवन की बड़ी उपलब्धियों के पीछे भागते हुए उन छोटे पलों को भूल जाते हैं, जो वास्तव में हमें खुशी देते हैं। किसी अपने के साथ समय बिताना, साथ टहलना, प्रकृति को महसूस करना या किसी के लिए अपनी ओर से छोटा-सा प्रयास करना भी बहुत मायने रखता है।

हमें हर नए दिन की सराहना करनी चाहिए और जीवन को एक व्यापक दृष्टि से देखना चाहिए, मुझे सबसे अधिक अच्छा लगा। कठिनाइयाँ आने पर भी स्वयं पर विश्वास बनाए रखना और अपने लिए महत्वपूर्ण चीजों को संजोकर रखना एक बहुत सकारात्मक संदेश है। हमें भी अपने जीवन के सुंदर अनुभवों, रिश्तों और यादों को सहेजकर रखना चाहिए।

इस अध्याय ने मुझे यह समझाया कि जिस चीज़ की हम तलाश कर रहे होते हैं, वह हमेशा बहुत दूर नहीं होती; कई बार वह हमारे आसपास, किताबों में, रिश्तों में और हमारे छोटे-छोटे अनुभवों में ही मौजूद होती है। अब मैं पुस्तकालय को केवल किताबें पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि अपने विचारों, सपनों और स्वयं को समझने की जगह के रूप में देखती हूँ। यह अध्याय मुझे अधिक जिज्ञासु, आभारी और सकारात्मक होकर जीवन को देखने की प्रेरणा देता है।
मंजुला सागर
स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा
आज हम लोगों को GSA क्लास में स्वामी विवेकानंद की कहानी सुनाई गई। इस कहानी में स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, मेहनत, ज्ञान और देशप्रेम के बारे में बताया गया है। वे कठिन परिस्थितियों से कभी घबराए नहीं और हमेशा सीखने तथा आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। उन्होंने लोगों को सिखाया कि हमें अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए और अपने लक्ष्य को पाने के लिए ईमानदारी, मेहनत और लगन से प्रयास करना चाहिए। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि कठिनाइयों से हार नहीं माननी चाहिए, आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए।
अभय कुमार वर्मा, कक्षा 8
जमशेदजी टाटा की कहानी
आज GSA की कक्षा में हमने ये कहानियाँ सीखीं।
जमशेदजी टाटा भारत के महान उद्योगपतियों में से एक थे। उनका जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में हुआ था। उन्होंने भारत को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने का सपना देखा। उन्होंने कपड़ा उद्योग में सफलता प्राप्त की और आगे चलकर भारतीय उद्योग के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनका सपना भारत में एक बड़ा वैज्ञानिक संस्थान और आधुनिक उद्योग स्थापित करना था। उनके प्रयासों से आगे चलकर टाटा समूह का विस्तार हुआ। जमशेदजी टाटा का जीवन हमें मेहनत, दूरदर्शिता और देश के विकास के लिए काम करने की प्रेरणा देता है।

प्रिय स्वामी विवेकानंद जी की कहानी
स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत, विचारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। वे बचपन से ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे, जिनसे उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। 1893 में उन्होंने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद में भारत का प्रभावशाली परिचय कराया। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, मेहनत और देशसेवा का संदेश दिया। उनका जीवन हमें साहस, अनुशासन और मानव सेवा की प्रेरणा देता है।
शिवांगी

आज की कक्षा में हमें स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, मेहनत, ज्ञान और देशप्रेम के बारे में बताया गया है। वह कठिन परिस्थितियों में भी कभी घबराए नहीं और हमेशा सीखने तथा लोगों को सिखाया कि हमें अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए और अपने लक्ष्य को पाने के लिए ईमानदारी, मेहनत और लगन से प्रयास करना चाहिए। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि कठिनाइयों से हार नहीं माननी चाहिए, आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना चाहिए।
शिवानी सिंह, कक्षा – 7

आज की कक्षा में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था “प्रिय स्वामी विवेकानंद भाग – 2”। स्वामी विवेकानंद और जमसेट जी टाटा के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात और उसके बाद के घटनाक्रम को उजागर करता है। यह कहानी जहाज की प्रसिद्ध भेंट के 5 साल बाद टाटा द्वारा स्वामी जी को लिखे गए उस पत्र पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने भारत में भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना के लिए उनका मार्गदर्शन और समर्थन माँगा था। यह प्रसंग दोनों महान दिग्गजों की राष्ट्र निर्माण के प्रति दूरदर्शी सोच और देशप्रेम को दर्शाता है।
श्रुति पटेल, कक्षा – 8

आज की GSA क्लास में हमें “प्रिय स्वामी विवेकानंद भाग 2” और “ओके टाटा ओके सुमो” की कहानी सुनाई गई, जिसके माध्यम से उनके जीवन और उनके विचारों को समझा गया है। इस कहानी से मैंने सीखा कि हमें जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। कठिन परिस्थितियों में विश्वास और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से मुझे दूसरों की मदद करने, मेहनत करने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिलती है। हर कठिनाई का सामना हमें अकेले, खुद खड़े होकर करना चाहिए और अपने लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए। मैं भी उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाकर एक अच्छा और जिम्मेदार इंसान बनना चाहूँगी।
रिया विश्वकर्मा, कक्षा – 7

आज की GSA की कक्षा में हमें “प्रिय स्वामी विवेकानंद भाग 2” और “आओ टाटा आओ सुमो” की कहानी सुनाई गई, जिसके माध्यम से उनके जीवन और अच्छे विचारों को समझा। स्वामी विवेकानंद और जमशेटजी टाटा के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात और उसके बाद के घटनाक्रम को उजागर करता है। यह प्रसंग दोनों महान दिग्गजों की राष्ट्र निर्माण के प्रति दूरदर्शी सोच और देशप्रेम को दर्शाता है। इसका संदेश था कि हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए और कठिनाइयों से कभी डरना नहीं चाहिए। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सच्चाई से हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। हर कठिनाई का सामना करना चाहिए और अपने लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
अंशिका वर्मा, कक्षा – 8

कल हमें GSA क्लास में स्वामी विवेकानंद के जीवन के भाग 2 के बारे में बताया गया, जिससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें जीवन में कभी हार नहीं मानना चाहिए। कठिन परिस्थिति में भी हमें उम्मीद और विश्वास बनाए रखना चाहिए। स्वामी जी के जीवन से मुझे दूसरों की मदद करने, अपने लक्ष्य पर ध्यान देने और मेहनत करने की प्रेरणा मिली। उनका विचार है कि “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक तुम्हें लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”, जो मुझे आजीवन याद रहेगा। मुझे लगता है कि स्वामी विवेकानंद के विचारों को जो अपने जीवन में अपनाएगा, वह एक अच्छा और जिम्मेदार व्यक्ति बन पाएगा।
प्रिया पाल, कक्षा 8

आज के GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था “प्रिय स्वामी विवेकानंद भाग 2”। स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित यह कहानी हमें राष्ट्र प्रेम, दूरदर्शिता और मिलकर देश के विकास के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि महान और सफल लोग जब भी मिलते हैं, वे व्यक्तिगत चर्चा की बजाय समाज और देश के उत्थान के लिए विचार रखते हैं।
स्वाति सिंह, कक्षा 8

आज की GSA क्लास में हमने स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के बारे में बताया गया। क्लास में बताया गया कि कैसे स्वामी जी के ज्ञान और आत्मविश्वास ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया, जबकि जमशेदजी टाटा ने अपनी दूरदर्शिता और मेहनत से देश को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाया। हमने उन दोनों के बीच जहाज़ में हुई ऐतिहासिक मुलाकात के बारे में भी जाना, जिसने भारत में बड़े वैज्ञानिक संस्थान की नींव रखी। इस पूरी क्लास से हमें यह सीख मिली कि जिंदगी में चाहे जितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि आत्मविश्वास, ईमानदारी और कड़ी मेहनत के साथ हमेशा अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
Rakshit, Class 8

Saturday, 5 September 2026

दृढ़ संकल्प, राष्ट्रसेवा और प्रेरणादायक विचार - सनबीम ग्रामीण स्कूल

जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद

जमशेदजी टाटा का जीवन मेरे लिए दृढ़ संकल्प, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने ऐसे समय में भारत में उद्योग और शिक्षा के विकास का सपना देखा, जब देश अनेक चुनौतियों से गुजर रहा था। उनका उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना था।

उनकी स्वामी विवेकानंद से हुई मुलाकात ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया। दोनों महान व्यक्तित्वों की सोच अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी थी, लेकिन दोनों के मन में देश के विकास और समाज की भलाई का भाव समान था। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर जमशेदजी टाटा ने विज्ञान, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को और गहराई से महसूस किया।

इस प्रसंग से मुझे यह सीख मिली कि एक महान विचार तभी सार्थक होता है, जब उसे कर्म और दृढ़ संकल्प का साथ मिले। जमशेदजी टाटा ने अपने सपनों को केवल अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें राष्ट्र के भविष्य से जोड़ दिया।

इस कहानी ने मुझे यह समझाया कि सच्ची सफलता केवल स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, मेहनत और क्षमताओं का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करने में है। जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद की यह मुलाकात आज भी हमें बड़े सपने देखने और उन्हें सकारात्मक दिशा में साकार करने की प्रेरणा देती है।

Swati Tripathi

जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद

आज की कक्षा में जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद की जीवनी की कहानी सुनाई गई।

एक बार जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद समुद्री यात्रा के दौरान मिले। दोनों के बीच भारत के भविष्य और देश की प्रगति को लेकर बातचीत हुई। जमशेदजी टाटा भारत में उद्योग और विज्ञान को आगे बढ़ाना चाहते थे। उनका मानना था कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में वैज्ञानिक शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है।

स्वामी विवेकानंद भी चाहते थे कि भारत के युवा शिक्षा, विज्ञान और ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ें। उन्होंने जमशेदजी टाटा को भारत में एक ऐसे संस्थान की स्थापना के लिए प्रेरित किया, जहाँ उच्च स्तर पर विज्ञान और अनुसंधान किया जा सके।

हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि देश की प्रगति के लिए उद्योग, विज्ञान, शिक्षा और युवा शक्ति सभी का योगदान आवश्यक है। महान सोच रखने वाले लोग मिलकर काम करते हैं, तो उनके विचार आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदल सकते हैं।

धन्यवाद।
साक्षी पटेल, कक्षा 8

जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद

आज की GSA क्लास में हमें जमशेदजी टाटा के बारे में बताया गया। टाटा सर को भारत के उद्योगों का पिता कहा जाता है। उनका जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी शहर में हुआ था। उन्होंने देखा कि भारत में सभी वस्तुएँ विदेश से आया करती थीं, इसलिए उन्होंने भारत को अपने पैरों पर खड़ा करने का सपना देखा। उन्होंने सबसे पहले कपड़ों की मिल लगाई। इसी सोच के साथ आज टाटा स्टील, ताज होटल और IISc बैंगलोर अस्तित्व में आए।

उनका जीवन कठिन था, परंतु हमें यह सिखाता है कि सपने बड़े हों या छोटे, उन्हें पूरा करने के लिए हमें अपनी पूरी मेहनत करनी चाहिए।

इसी के साथ हमें स्वामी विवेकानंद की कहानी के भाग 1 को समझाया गया। विवेकानंद भारत के महान संत और युवाओं के हीरो थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। स्वामी जी बहुत बहादुर और ज्ञानी थे। 1893 में उन्होंने शिकागो जाकर दुनिया को बताया कि भारत का धर्म कितना महान है। उन्होंने हमेशा कहा, “उठो, जागो और तब तक रुको मत, जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाए।” उनका जीवन हमें सिखाता है कि हमें मेहनत और खुद पर भरोसा सदैव करना चाहिए।
धन्यवाद!
प्रिय पाल, कक्षा 8

Sunday School: Read, Reflect and Have Fun - PYDS Learning Academy

Sunday School is a wonderful time to read, learn and have fun together. Our reading sessions encourage us to share our ideas, listen to different perspectives and reflect on what we have read. Through these conversations, we develop a deeper understanding of the story and ourselves. Reading together makes learning joyful, meaningful and engaging. 

Saturday, 29 August 2026

बाघ राजा से मिली सीख - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज के सेशन में कहानी पढ़ने के बाद हमने यह जाना कि हम जिस चीज से डरकर उसे अपने से दूर भगाने की कोशिश करते हैं, वह चीज जब हमसे दूर हो जाती है, तो हमें उसकी कमी महसूस होने लगती है। जैसा कि हमने जाना, कहानी में बाघ को देखते ही गाँव के लोगों के मन में डर पैदा हो गया। वे सब मिलकर उसे भगाने लगे। बाघ चला गया तो गाँव सुरक्षित हो गया, लेकिन कुछ समय बाद जब वही लोग जंगल की ओर देखे, तो जंगल का सूनापन महसूस किए और तब उन्हें उस बाघ की याद आने लगी, जिसे कभी वे अपना सबसे बड़ा खतरा समझ रहे थे।

हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है। कोई व्यक्ति हमें टोकता है, हमारी गलतियाँ बताता है या अनुशासन में रहने के लिए प्रेरित करता है, तो उस समय हमें उसका व्यवहार अच्छा नहीं लगता। लेकिन जब वह व्यक्ति हमारे साथ नहीं होता, तब उसकी कही हुई बातें और उसका अपनापन याद आता है।

एक शिक्षक के रूप में इस कहानी से मुझे यह सीख मिली कि विद्यालय में हर बच्चा अपनी क्षमता लेकर आता है, लेकिन उसे सही दिशा देने के लिए प्रेम, धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। किसी बच्चे को केवल उसकी कमजोरी देखकर कमजोर मान लेना वैसा ही है, जैसे जंगल में किसी जीव की शक्ति को केवल उसके बाहरी रूप से आँकना। बाघ मेरे लिए केवल एक कहानी का एक पात्र नहीं, बल्कि एक आईना है—जो पूछता है कि मेरे आस-पास कितना अधिकार है, यह महत्वपूर्ण नहीं; मैं उस अधिकार का उपयोग दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितना करता हूँ, यह अधिक महत्वपूर्ण है। एक बच्चे के जीवन में शिक्षक कभी-कभी उस बाघ की तरह दिखाई देता है—जो अनुशासन के कारण कठोर लगता है, लेकिन उसकी मौजूदगी बच्चों के जीवन में दिशा, सुरक्षा और सीख लेकर आती है।

गुलाबी

आज हम लोगों को GSA Class में बाघ राजा की कहानी सुनाई गई। एक जंगल में एक खूंखार शेर रहता था। जंगल के पास एक गाँव था, जिसके लोग शेर से बहुत डरते थे। एक दिन गाँववालों ने शेर को मारने का फैसला किया और किसी तरह उसे बंदूकों से घायल कर दिया। घायल शेर नदी में गिर गया और बहते-बहते दूर चला गया। कुछ समय बाद गाँववालों को एहसास हुआ कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। उन्हें समझ आया कि शेर उनके लिए एक तरह से रक्षक भी था, क्योंकि जब कोई इंसान जंगल के पेड़-पौधे काटने आता, तो शेर के डर से भाग जाता था। तब गाँववालों को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमारे पास जो चीजें या लोग होते हैं, हमें उनकी कद्र अक्सर तब समझ आती है, जब वे हमसे दूर चले जाते हैं। इसलिए हमें किसी की महत्ता खोने के बाद नहीं, बल्कि उसके हमारे पास रहते हुए ही समझनी चाहिए।

अभय कुमार वर्मा, कक्षा 8

सुप्रभात एवं जय हिंद। आज की GSA Class में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि आज के समय में जंगलों की कटाई और वन्यजीवों जैसे शेर, बाघ आदि जानवरों को मारना इंसान की बहुत बड़ी भूल है। यदि धरती से जंगली जानवर खत्म हो गए, तो मनुष्य का जीवित रहना असुरक्षित हो जाएगा। शेर और बाघ जैसे हिंसक जानवर शाकाहारी जानवरों, हिरण, जंगली सूअर का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रण में रखते हैं। अगर बाघ नहीं होंगे, तो शाकाहारी जानवरों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि वे गाँव और खेतों में घुसकर पूरी फसलें नष्ट कर देंगे। इससे भुखमरी फैल जाएगी। जब प्राकृतिक शिकारी जैसे बाघ, चील, शेर आदि जानवर नहीं रहेंगे, तो बीमार और सड़े जानवरों को खाने वाला कोई नहीं होगा। इससे पर्यावरण दूषित होगा और मनुष्य अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाएँगे। कहानी से हमें यह मुख्य सीख मिलती है कि जंगल और जानवर इंसान के दुश्मन नहीं, बल्कि हमारे जीवन के रक्षक हैं। शेर, बाघ आदि जानवरों को मारकर मनुष्य खुद अपनी मौत को दावत दे रहा है।

धन्यवाद
नाम: स्वाति सिंह, कक्षा 8

जय हिंद।

आज की GSA Class में एक कहानी को पूरा किया गया, जिसका नाम बाघ राजा था। इस कहानी में बताया गया कि एक जंगल में बाघ को मारकर भागने की कोशिश की जा रही थी। बाघ को चोट पहुँचने पर वह नदी में गिरा। नदी के बहाव के कारण वह एक रेतीले स्थान पर पहुँच गया, जिससे गाँव वालों को लगा कि बाघ की मृत्यु हो गई है। कुछ दिनों तक तो सब ठीक चल रहा था, परंतु कुछ दिनों बाद लोगों को एहसास हुआ कि उन्होंने खुद के लिए खुद ही मुसीबत बुलाई है। उन्हें अंत में एहसास हुआ कि उन्होंने अपने रक्षक को खुद ही मार दिया। हाँ, जंगली जानवर भी अपने जंगल के साथ-साथ अपने आसपास के स्थान को भी सुरक्षित करते हैं। जिस प्रकार कहानी में बाघ ने शिकारी और स्थान को हड़पने वाले लोगों से जंगल और गाँव को सुरक्षित कर रखा था, उन्हें एहसास हुआ कि बाघ के चले जाने से जंगल के छोटे एवं खतरनाक जंतुओं को भी शिकारी मार सकते हैं। वहाँ के पेड़ों को काट सकते हैं तथा हम सभी को पता है कि पेड़ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। पेड़ों से ही हमें जीवित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऑक्सीजन मिलती है, फल मिलते हैं और हवा प्राप्त होती है। इससे जीवों को अत्यधिक नुकसान पहुँचेगा। उन्हें अपना घर खोना पड़ेगा।

सीख :- हमें हर उस वस्तु की हमारे जीवन में कीमत उसके जाने के बाद पता चलती है। इससे हमारे बीच, मतलब जंगल में रहने वाले जीव, विलुप्त हो जाते हैं। इससे हमारे पर्यावरण को भी अत्यधिक नुकसान पहुँचता है।

धन्यवाद
प्रिया पाल, कक्षा 8

 

Exploring Family, Nature and Relationships - Sunbeam School Mau

Session's Feedback

The session on “My Family and Other Animals” with Brinda Ghosh ma'am was engaging, insightful, and enriching. The session beautifully explored the themes of family, relationships, nature, and the fascinating bond between humans and animals. Brinda Ghosh’s lively, captivating narration made the discussion enjoyable and easy to connect with.

The session encouraged us to look at the text from different perspectives and helped us appreciate the author’s unique way of portraying family and nature. Overall, it was an interactive and thought-provoking session that deepened our understanding of the work and left us with many interesting insights.

Regards,
Srishti Rai

I really enjoyed the session on “My Family and Other Animals” by Brinda Ghosh ma'am. It was fun, interactive, and helped me better understand the book. I loved listening to the interesting insights and stories shared during the session. Overall, it was a wonderful and enriching experience!

Sanyukta Gupta
Monitor- V Amazing

The session was enriching and practical. Gerald Durrell’s words reminded me that slowing down helps us notice the extraordinary in ordinary routines, just as I pause during assemblies to observe gratitude and discipline in small gestures. Michiko Aoyama’s story of rice balls and crabs echoed how everyday choices, even in food or care, reflect empathy and respect, values I try to weave into classroom practices and family life. Overall, the readings were not just literary; they were mirrors to daily living, urging us to stay attentive, empathetic, and open-minded in our roles as educators and individuals.

Ravina

Learning Through Reflection- PYDS Learning Academy

Students learn best when they pause to introspect, reflect on their experiences, understand their mistakes, and connect learning with real-life situations. Reflection helps students become thoughtful, independent, and responsible learners.

My Good School Reflection by Manisha Khanna

Monday, 17 August 2026

शामली में ठहरा वक्त - सपना राय

पुस्तक  "शामली में ठहरा वक्त और अन्य कहानियाँ " में मनीषा मैम का चरित्र-चित्रण और कहानी का ताना-बाना अत्यंत व्यावहारिक, संवेदनशील और विचारशील तरीके से बुना गया है। इस अंश की समीक्षा और फीडबैक मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

संवाद और उच्चारण की स्पष्टता: कहानी में मनीषा मैम की संवाद शैली को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। उनके बोलने का तरीका इतना स्पष्ट, नपा-तुला और प्रभावशाली है कि हर एक शब्द श्रोता या पाठक के मन में सीधे उतरता है। वे शब्दों को सिर्फ बोलती नहीं हैं, बल्कि उनके अर्थ और वजन को पूरी तरह समझाते हुए इस्तेमाल करती हैं।

गहरी समझ और परिपक्वता यह महज एक साधारण किस्सा न होकर एक समझदार और परिपक्व इंसान और समझदार बाघ की कहानी है। मनीषा मैम का दृष्टिकोण जीवन की उलझनों को सुलझाने वाला, संवेदनशील और दूसरों की भावनाओं को गहराई से समझने वाला दिखता है।

भावनात्मक जुड़ाव कहानी के इस हिस्से में संवादों के जरिए पात्रों की आंतरिक मनोदशा को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। शब्दों का सही चुनाव और बात रखने की स्पष्टता यह दर्शाती है कि एक अच्छा वक्ता और मार्गदर्शक कैसे वातावरण को सकारात्मक बना सकता है।

व्यावहारिक ज्ञान दो की लड़ाई में तीसरे का फायदा.... बिल्ली और बंदर की कहानी के माध्यम से चील का शिकार ले जाने को जोड़ना।

बाघ पालतू जानवर खाने के लिए मजबूर था। आज के समय में हमने जंगलों को काट के जीव जंतुओं के स्थान को समाप्त कर दिया जिसके कारण बाघ भी अब नदी के बाई ओर ही जा सकता था।

निष्कर्ष यह अंश भाषा की सादगी, स्पष्ट अभिव्यक्ति और वैचारिक गहराई का एक बेहतरीन संगम है। मनीषा मैम के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि जब बातचीत में स्पष्टता, ठहराव और समझदारी हो, तो साधारण से शब्द भी जीवन और सोच को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

सपना राय 
PGT
सनबीम स्कूल मऊ

Saturday, 15 August 2026

बाघ राजा: शक्ति से अधिक सूझबूझ का महत्व - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज हम लोगों को GSA क्लास में My Family and Other Animals की कहानी सुनाई गई। कहानी में एक परिवार अपने घर में रहने वाले जानवरों और पक्षियों के कारण कई मजेदार घटनाओं का सामना करता है। परिवार का एक बच्चा जानवरों को बहुत पसंद करता था और उनकी देखभाल में व्यस्त रहता था। कभी-कभी इसी कारण घर में छोटी-छोटी परेशानियाँ भी हो जाती थीं। बाद में उसने जानवरों की देखभाल के साथ अपनी जिम्मेदारियों और पढ़ाई पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया।

सीख: हमें अपने शौक के साथ अपनी जिम्मेदारियों और पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए।
Abhay Kumar Verma, Class 8

सुप्रभात एवं जय हिंद। आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि खुद को सबसे शक्तिशाली समझकर दूसरों को कमजोर समझना इंसान को बर्बाद कर देता है। केवल शारीरिक ताकत से ज्यादा जरूरी सूझबूझ और सही समय पर सही फैसला लेना होता है। राजा या शक्तिशाली वह है, जो जिम्मेदारी समझे और सबकी भलाई करे।

इस कहानी से हमें मुख्य सीख मिलती है। बाघ राजा जैसी नैतिक कहानियों से हमें यह सीख मिलती है कि अहंकार, दूसरों को नीचा दिखाना और सिर्फ ताकत के बल पर शासन करना पतन का कारण बनता है। एक अच्छा और सच्चा लीडर वही होता है, जो अपनी ताकत का इस्तेमाल दूसरों पर शासन करने की वजह से अपनी प्रजा और अपनों की रक्षा करने के लिए करता है।
स्वाति सिंह, कक्षा 8

जय हिन्द। आज की कक्षा में एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम "बाघ राजा" है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सिर्फ ताकतवर होना काफी नहीं है। जो दूसरों का ख्याल रखे, वही असली नेता है। घमंड इंसान को अकेला कर देता है। एक दिन अपने ही साथ छोड़ देते हैं।

छोटे-छोटे जानवर भी एक साथ आकर बड़े से बड़े अत्याचार का विरोध कर सकते हैं। बाघ राजा ने जब अपनी गलती मानी और सुधरा, तभी वह सच्चा "राजा" बन पाया। जो प्यार और इज्जत देता है, उसी का सम्मान करते हैं।
साक्षी पटेल, कक्षा 8

जय हिंद। आज की कक्षा में एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम 'बाघ राजा' है।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि केवल शारीरिक ताकत से ज्यादा जरूरी सूझबूझ और सही समय पर सही फैसला लेना चाहिए। खुद को शक्तिशाली समझकर दूसरों को कमजोर समझना मनुष्य को बर्बाद कर देता है। एक अच्छा और सच्चा लीडर वही होता है, जो अपनी ताकत का इस्तेमाल दूसरों पर शासन की बजाय अपनी प्रजा और अपनों की रक्षा करने के लिए करता है। जो दूसरों का ख्याल रखे, वही असली नेता है। छोटे-छोटे जानवर भी एक साथ आकर बड़े से बड़े ताकतवर जानवर को हरा सकते हैं।
 अंशिका वर्मा, कक्षा 8

जय हिंद आज के कक्षा में हमें एक प्रेरणादायक कहानी सुनाई गई जिसका नाम था बाघ राजा इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है की खुद को सबसे शक्तिशाली समझ कर दूसरों को कमजोर समझना मनुष्य को बर्बाद कर देता है ।केवल शारीरिक ताकत से ज्यादा जरूरी सूझबूझ और सही समय पर सही फैसला लेना होता है राजा या शक्तिशाली वह है जो जिम्मेदारी समझे और सब की भलाई करें । इस कहानी से हमें मुख्य सीख मिलती है बाघ राजा जैसी नैतिक कहानियां से हमें यह सीख मिलती है की अहंकार दूसरों को नीचा दिखाना और सिर्फ ताकत के बल पर शासन करना पतन का कारण बनता है । एक अच्छा और सच्चा लीडर वही होता है जो अपनी ताकत का इस्तेमाल दूसरों पर शासन की वजह अपनी प्रजा और अपनों की रक्षा करने के लिए करता है।
शिवानी सिंह, कक्षा 7 

My Family and Other Animals - Ravi Prakash


इस पुस्तक को पढ़कर मुझे प्रकृति, परिवार और पशु-पक्षियों के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला। लेखक ने अपने परिवार और जानवरों के अनुभवों को बहुत सरल और रोचक तरीके से बताया है। एक शिक्षक के रूप में मुझे लगा कि बच्चों को किताबों के साथ-साथ प्रकृति और अपने आसपास के जीव-जंतुओं को भी समझना चाहिए।

इस पुस्तक से मुझे यह सीख मिली कि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिज्ञासा बढ़ानी चाहिए। हमें बच्चों को पशु-पक्षियों के साथ दया और प्रेम से व्यवहार करना सिखाना चाहिए। परिवार के साथ समय बिताने और एक-दूसरे को समझने का महत्व भी समझ में आता है। प्रकृति बच्चों के लिए सीखने का एक अच्छा माध्यम हो सकती है।
मैं अपने विद्यार्थियों को पर्यावरण और जीव-जंतुओं की देखभाल के लिए प्रेरित करूँगा। यह पुस्तक मुझे एक संवेदनशील और बेहतर शिक्षक बनने की प्रेरणा देती है।
रवि प्रकाश 

Learning with Joy - PYDS Learning Academy

My Good School Reflections

PYDS Learning Academy shares a delightful reflection on Sunday School, where learning goes beyond textbooks and becomes an experience filled with curiosity, participation, and joy. The students look forward to each session, enjoying stories, discussions, activities, and opportunities to share their thoughts.

Sunday School shows that meaningful learning can be fun and engaging. Through interactive sessions, students develop vocabulary, confidence, thinking skills, and the habit of reflection. It is a space where children learn together, express themselves freely, and discover that every lesson can bring a new idea, question, or insight.

The reflection beautifully captures the spirit of joyful learning—when children enjoy learning, they learn with greater curiosity, confidence, and purpose.


Saturday, 8 August 2026

बाघ राजा की कहानी- सनबीम ग्रामीण स्कूल

वन्यजीव और प्रकृति के प्रति संवेदनहीनता और शोषण: कहानी इंसानों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए बेजुबान जानवरों और प्रकृति के शोषण को उजागर करती है। बाघ राजा ने अपनी बुद्धिमत्ता एवं अपने ऊपर हुए अत्याचार के अनुभव से मनुष्यों के शिकार से बचता रहा। यह हमें सिखाती है कि समझदारी, बुद्धिमत्ता से हम अपने आप को बचा सकते हैं। इसके अलावा, यह अहंकार और शक्ति के दुरुपयोग से बचने तथा जीवों के प्रति दया भाव रखने का संदेश देती है और जीवों को स्वतंत्रता एवं अनुकूलित वातावरण देना चाहिए।
- लवकुश सिंह यादव

आज के GSA कक्षा में एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम- बाघ राजा की कहानी

एक बार की बात है। एक राज्य में एक राजा रहता था। उसका नाम बाघ राजा था। वह बहुत घमंडी और आलसी था। उसे अपनी प्रजा की समस्याओं की कोई चिंता नहीं थी।

एक दिन राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया। खेत सूख गए और लोगों के पास खाने के लिए अनाज भी कम पड़ने लगा। प्रजा राजा के पास मदद माँगने पहुँची, लेकिन राजा ने उनकी बात नहीं सुनी।

राजा के एक बुद्धिमान मंत्री ने उसे समझाया, “महाराज, राजा का कर्तव्य अपनी प्रजा की रक्षा करना है। यदि प्रजा दुखी है, तो राजा भी सुखी नहीं रह सकता।

राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत राज्य के तालाबों की सफाई करवाने, कुएँ खुदवाने और गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया। वह स्वयं भी लोगों के साथ मिलकर काम करने लगा। कुछ समय बाद वर्षा हुई। खेत फिर से हरे-भरे हो गए और राज्य में खुशहाली लौट आई। प्रजा अपने राजा से बहुत प्रसन्न हुई। राजा ने समझ लिया कि सच्चा राजा वही है, जो अपनी प्रजा के सुख-दुख को अपना सुख-दुख समझे।

शिक्षा: हमें घमंड और आलस्य छोड़कर अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना चाहिए।
नाम: शिवांगी सिंह, कक्षा 7

आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जीवों की बेकसूर हत्या और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का परिणाम भयंकर होता है। इंसान अपनी चालों से मौत या अपने भाग्य को नहीं बदल सकता है। जिस प्रकार राजा अपनी शक्ति और जीत के आगे अंधा हो जाता है, जिसके कारण उसका अंत बुरा होता है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि अहंकार इंसान को अंधा कर देता है। बाघ और राजा जैसी जुड़ी कहानियों से हमें यह मुख्य सीख मिलती है कि अहंकार, प्रकृति विनाश और जिद इंसान के पतन का कारण बनता है। इस कहानी के जरिए हमें जीवन में कई अहम सबक सीखने को मिलते हैं।
नाम: स्वाति सिंह, कक्षा 8

वन्यजीव और प्रकृति के प्रति संवेदनहीनता और शोषण: कहानी इंसानों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए बेजुबान जानवरों और प्रकृति के शोषण को उजागर करती है। बाघ राजा ने अपनी बुद्धिमत्ता एवं अपने ऊपर हुए अत्याचार के अनुभव से मनुष्यों के शिकार से बचाता रहा है।

यह हमें सिखाती है कि समझदारी, बुद्धिमत्ता से हम अपने आप को बचा सकते हैं। इसके अलावा, यह अहंकार और शक्ति के दुरुपयोग से बचने तथा जीवों के प्रति दया भाव रखने का संदेश देती है और जीवों को स्वतंत्रता एवं अनुकूलित वातावरण देना चाहिए।
नाम: संगम जी सत्ये, कक्षा: 7

आज की कक्षा में एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम 'बाघ राजा' है।

एक घने जंगल में एक शक्तिशाली बाघ रहता था। सभी जानवर उसे जंगल का राजा मानते थे। बाघ अपनी ताकत पर बहुत घमंड करता था और छोटे जानवरों को डराकर रखता था। एक दिन जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। पानी की केवल एक छोटी-सी झील बची। बाघ ने सोचा कि वह किसी और जानवर को पानी नहीं पीने देगा। उसने झील के पास पहरा देना शुरू कर दिया।

कुछ दिनों बाद बाघ भी प्यास से कमजोर होने लगा। तभी एक बुद्धिमान हाथी ने सभी जानवरों को साथ लेकर कहा, "यदि हम मिलकर पानी का सही उपयोग करें, तो सभी की प्यास बुझ सकती है।"

बाघ को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सभी से माफी माँगी और सबके साथ मिलकर झील का पानी बाँटने लगा। फिर उस दिन से बाघ ने घमंड छोड़ दिया और न्यायप्रिय राजा बन गया।

हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि:- घमंड का अंत हमेशा बुरा होता है। मिल-जुलकर रहने और बाँटकर उपयोग करने से सभी का भला होता है। अपनी गलती मानकर उसे सुधारना ही सच्ची बहादुरी है।
नाम: साक्षी पटेल, कक्षा 8th

आज हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम "बाघ राजा" था। इस कहानी ने हमें सिखाया कि घमंड इंसान को अकेला कर देता है। बाघ अपनी ताकत से सबको डरता था और सब उससे डरते भी थे। कोई भी उससे प्यार नहीं करता था। जब मुसीबत आई तो सब उसके पिछले व्यवहार के कारण उसकी मदद नहीं कर पाए। दूसरी सीख यह है कि मिल-जुलकर रहना और आपस में वस्तुओं का इस्तेमाल करना बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार बाघ ने सभी जानवरों के साथ किया और उसके साथ हुआ, अगर वह सभी के साथ अच्छा व्यवहार करता, तो उसके कठिन समय में सब उसकी सहायता करते, परंतु उन्होंने नहीं किया क्योंकि वे उससे डरते थे। तीसरी और सबसे बड़ी सीख, जो मुझे खासकर अच्छी लगी, हमें अपनी गलतियाँ मान लेनी चाहिए, परंतु उससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हमें अपनी गलतियों को जानकर उनमें सुधार कर लेना चाहिए और जिससे नुकसान पहुँचा है, उससे विनम्र भाव से माफी माँग लेनी चाहिए।

इसलिए हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए और सभी के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए और सभी के साथ विनम्र स्वभाव से पेश आना चाहिए। गलती होने पर उसे सुधारकर, हमारी गलती से सामने वाले को जो नुकसान हुआ है, उससे माफी माँगनी चाहिए।
 प्रिया पाल, कक्षा 8

आज की GSA क्लास में हमने यह सीखा कि "बाघ राजा" की कहानियों के अलग-अलग पहलू हमें जीवन और समाज को बेहतर ढंग से जीने का एक संपूर्ण मार्ग दिखाते हैं। पहली और सबसे बड़ी सीख यह है कि घमंड, अहंकार और अपनी ताकत का दुरुपयोग व्यक्ति को अंततः अकेला और कमजोर बना देता है, क्योंकि डर से पाई गई जगह कभी दिल में प्यार और सच्चे रिश्तों का रूप नहीं ले सकती। मुसीबत के समय सच्चा साथ और सुरक्षा ताकत से नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, समझदारी और मिल-जुलकर संसाधनों को बाँटने से ही संभव होती है। इसके साथ ही, ये कहानियाँ हमें अपनी गलतियों को पहचानकर, उन्हें सुधारने, विनम्रता से माफी माँगने और एक न्यायप्रिय इंसान बनने का संदेश देती हैं।
Rakshit, Class 8

आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। बाघ अपनी ताकत से सबको डराता है और घमंडी इंसान को अकेला कर देता है। हम सबको मिल-जुलकर रहना चाहिए। हमें सबकी मदद करनी चाहिए। हमें अपनी गलती जानकर मान लेना चाहिए कि वह गलती हमारी है, लेकिन उससे अधिक महत्वपूर्ण है कि हमें विनम्र भाव से माफी माँग लेनी चाहिए। अहंकार इंसान को अंधा कर देता है। बाघ और राजा जैसी कहानियों से हमें सीख मिलती है कि जिद इंसान के पतन का कारण बनती है। समझदारी और बुद्धिमत्ता से हम अपने आप को किसी भी मुसीबत से बचा सकते हैं।
अंशिका वर्मा, कक्षा 8

इस कहानी में एक बाघ रहता है, जो जंगल में अपनी सुरक्षा खुद करता है और इंसानों से दूर रहता है। इस कहानी से हमें ये तीन सीख मिलती हैं।

  1. आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता जरूरी है। बाघ राजा किसी पर निर्भर नहीं रहता है। वह अपनी सुरक्षा खुद करता है और अपने नियमों से जीता है।
    सीख- अपनी मदद खुद करो, दूसरों पर निर्भर मत रहो; खुद में हिम्मत रखो।

  2. प्रकृति और जंगली जानवरों का सम्मान- बाघ राजा जंगल का हिस्सा है। इंसान जब उसके इलाके में घुसते हैं, तभी परेशानी होती है। सीख- जंगलों को काटो मत। हर जीव को जीने का हक है। प्रकृति से छेड़छाड़ करोगी, तो नुकसान तुम्हारा ही होगा।

  3. घमंड और लालच से बचो। अगर इंसान लालच में आकर बाघ का शिकार करने जाए, तो बाघ अपनी सुरक्षा के लिए हमला करता है।
    सीख- किसी को तंग मत करो। शांति से रहोगे, तो सब शांति से रहेंगे।

रस्किन बॉन्ड हमें सिखाते हैं कि जंगल बाघ का घर है। हमें उसका घर बचाना चाहिए, न कि उससे डरकर उसे मारना चाहिए।
नाम: शिवानी यादव, कक्षा: 7

आज की GSA कक्षा में एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम बाघ राजा था।

एक बार की बात है। एक राज्य में एक राजा रहता था। उसका नाम बाघ राजा था। वह बहुत घमंडी और आलसी था। उसे अपनी प्रजा की समस्याओं की कोई चिंता नहीं थी।

एक दिन राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया। खेत सूख गए और लोगों के पास खाने के लिए अनाज भी कम पड़ने लगा। प्रजा राजा के पास मदद माँगने पहुँची, लेकिन राजा ने उनकी बात नहीं सुनी। राजा के एक बुद्धिमान मंत्री ने उसे समझाया, “महाराज, राजा का कर्तव्य अपनी प्रजा की रक्षा करना है। यदि प्रजा दुखी है, तो राजा भी सुखी नहीं रह सकता।”

राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत राज्य के तालाबों की सफाई करवाने, कुएँ खुदवाने और गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया। वह स्वयं भी लोगों के साथ मिलकर काम करने लगा। कुछ समय बाद वर्षा हुई। खेत फिर से हरे-भरे हो गए और राज्य में खुशहाली लौट आई।

नाम: श्रुति पटेल, कक्षा 8

आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जीवों की हत्या होने से प्रकृति पर बहुत प्रभाव पड़ता है। यह हमें सिखाता है कि समझदारी, बुद्धिमत्ता से हम अपने आप को बचा सकते हैं। इसके अलावा, यह अहंकार और शक्ति के दुरुपयोग से बचने तथा जीवों के प्रति दयाभाव रखने का संदेश देता है।
नाम: आकांक्षा कुमारी, कक्षा 8

 

Living in Harmony with Nature: Lessons from Bagh Raja- Sangeeta Singh

Hindi Story: Bagh Raja by Ruskin Bond

The discussion on Bagh Raja made me think about how closely our lives are connected with nature. The story helped me look at the tiger not simply as a wild animal, but as a living being with its own needs, fears, instincts, and place in the natural world.

What stayed with me was the way human actions can disturb the natural balance. We often see animals from our own perspective without thinking about what they may be experiencing. The story made me reflect on the importance of coexistence rather than control.

It also connected beautifully with the idea of the life cycle—every living being has a role to play, and disturbing one part of nature can affect the larger ecosystem. As an educator, I feel that such stories allow us to help children develop empathy not only towards people but also towards all living beings.

For me, the biggest learning from Bagh Raja is simple: we are a part of nature, not separate from it. Respecting every form of life is essential for maintaining the balance of our world.

Regards,
Ms. Sangeeta Singh
Academic Head (VI–VIII)
Sunbeam School, Mau

What You Are Looking For Is in the Library- PYDS Learning Academy

 


The story What You Are Looking For Is in the Library beautifully reminds us that a library is much more than a place filled with books. It is a space where we can discover answers, ideas, courage, and sometimes even a new direction in life.

The story of Natsumi and her journey shows how books can help us understand ourselves and make meaningful choices. A simple visit to the library can open doors to new possibilities and help us find what we may not even know we are looking for.

The story reinforces the importance of reading in our lives. Books connect us with different people, experiences, and perspectives. They encourage curiosity, reflection, and thoughtful decision-making. Most importantly, the story reminds us that when we feel lost or uncertain, the right book may quietly lead us towards what we need.

Saturday, 1 August 2026

बुद्धिमानी, धैर्य और परोपकार की प्रेरक कहानी- Sunbeam Gramin School

अध्याय — मेरा परिवार और अन्य जानवर

प्रकृति हमारे जीवन की सबसे बड़ी शिक्षिका है। यदि हम जिज्ञासा और संवेदनशीलता के साथ प्रकृति को देखें, तो हम उससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह अध्याय केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि परिवार के प्रेम, सहयोग, हास्य और आपसी समझ का सुंदर चित्रण भी है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि परिवार का साथ जीवन की कठिनाइयों को भी सरल बना देता है।

साथ ही, यह अध्याय हमें प्रत्येक जीव का सम्मान करने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। सभी जीव-जंतु पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और उनकी सुरक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
धन्यवाद।
- मनोज कुमार

आज की  कक्षा में "सदाबहार कौआ" नामक कहानी सुनाई गई।
एक घने जंगल में एक कौआ रहता था। उसका नाम सदाबहार था। वह बहुत बुद्धिमान, मेहनती और दयालु था। वह हमेशा दूसरों की मदद करता था, इसलिए जंगल के सभी पक्षी उसे बहुत पसंद करते थे।
एक दिन जंगल में भीषण गर्मी पड़ने लगी। तालाब और छोटे-छोटे गड्ढे सूख गए। सभी पक्षी प्यास से परेशान हो गए। सदाबहार पानी की खोज में उड़ते-उड़ते एक पुराने पेड़ के पास पहुँचा। वहाँ उसे एक घड़ा मिला, जिसमें थोड़ा-सा पानी था। लेकिन पानी इतना नीचे था कि उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँच सकती थी।
सदाबहार ने हार नहीं मानी। उसने आसपास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ उठाकर एक-एक करके घड़े में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया। उसने पहले स्वयं पानी पिया और फिर अपने सभी साथियों को बुलाकर उन्हें भी पानी पिलाया।
सभी पक्षियों ने सदाबहार की बुद्धिमानी, धैर्य और दयालुता की बहुत प्रशंसा की। उस दिन से पूरे जंगल में उसकी मिसाल दी जाने लगी।
शिक्षा:
बुद्धि, धैर्य और परिश्रम से हर कठिनाई का समाधान निकाला जा सकता है।
- शिवानी सिंह, कक्षा: 7

आज हमारी GSA कक्षा में हमें 'सदाबहार कौआ' की एक अत्यंत प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद कहानी सुनाई गई। इस कहानी का मुख्य पात्र 'सदाबहार' नाम का एक कौआ है, जो अपनी बुद्धिमानी, मेहनत और दयालु स्वभाव के कारण पूरे जंगल में प्रसिद्ध था।
कहानी में बताया गया कि जब भीषण गर्मी के कारण जंगल के सभी तालाब और जलस्रोत सूख गए तथा सभी पक्षी प्यास से व्याकुल हो गए, तब सदाबहार ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उसे एक घड़ा मिला, जिसमें थोड़ा-सा पानी था, लेकिन वह उसकी चोंच की पहुँच से नीचे था। उसने हार मानने के बजाय एक-एक करके कंकड़ घड़े में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे पानी का स्तर ऊपर आ गया। उसने पहले स्वयं पानी पिया और फिर अपने साथियों को भी बुलाकर पानी पिलाया।
इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, बुद्धिमानी और शांत मन से काम लेने पर हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। साथ ही, सच्ची बुद्धिमानी वही है, जो केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की सहायता करने में भी काम आए।
- रक्षित, कक्षा – 8

Reading, Reflection, and Deeper Learning- PYDS Learning Academy

 

Reflections -PYDS by Manisha Khanna

Every Sunday School session is an opportunity to discover new ideas, explore inspiring stories, and develop meaningful life skills. Reading is just the beginning—the real learning happens when students pause to reflect on what they have read, connect it with their own experiences, and express their thoughts in their own words.

Through thoughtful reflections, students transform stories into life lessons, strengthen their critical thinking, and build confidence in expressing their ideas. Each reflection is a celebration of curiosity, creativity, and deeper understanding, showing that every book has the power to inspire, every story has a lesson to teach, and every learner has a unique voice worth sharing.


Sunday School Reflections: Turning Reading into Meaningful Learning - Sunbeam School Varuna





Saturday, 25 July 2026

Finding Confidence and Joy Through Stories and Self-Discovery- Sunbeam School, Ballia

Book: What You Are Looking For Is in the Library

Mentor: Jugjiv Singh Sir

The webinar highlighted how books have the power to transform our thinking and help us understand ourselves better. The selected excerpts from What You Are Looking For Is in the Library showed that every individual has unique strengths, emotions, and experiences, and that kindness and encouragement can bring out the best in people.

The discussion about Confuciusornis symbolised discovering hidden potential and using creativity to give life to ideas. The reference to Monger, the "ultimate creature," reminded me that true strength is not only physical ability but also emotional resilience and the need for care and acceptance. The conversation about the Venus flytrap and other unusual examples encouraged curiosity and the habit of learning from nature.

One of the most touching parts was Nozomi's childhood experience of struggling to fit into the classroom. Ms. Komachi's simple words of appreciation changed her confidence and outlook. This reinforced the idea that a teacher's encouraging words can leave a lifelong impact on a student's life.

As a teacher, I realised that every learner has a different story and learns differently. My responsibility is not only to teach the syllabus but also to create a classroom where students feel respected, valued, and confident to express themselves. I will encourage reading, creativity, empathy, and meaningful discussions so that students develop both academically and emotionally.

Overall, the session reminded me that libraries and books are not merely places for information; they are spaces where hope, self-discovery, imagination, and lifelong learning begin.

This reflection has inspired me to become a more compassionate, patient, and encouraging educator who helps every child discover what they are truly looking for.
Regards,
Riya Yadav

The reading sessions were both enlightening and enjoyable, offering me an excellent platform to develop my reading habits, improve my comprehension skills, and appreciate the beauty of literature.

The first session was conducted by Brinda Ma'am, where she discussed the book My Family and Other Animals. In the session, Ma'am discussed the chapter "Conversation." Through the author's vivid descriptions, I experienced the charm of the spring season and the fascinating world of nature. Brinda Ma'am's engaging narration made the session both informative and captivating.

The second session was conducted by Jugjiv Sir, who guided us through the chapter "Hiroya" from What You Are Looking For Is in the Library. He made the session more engaging by asking many questions and also encouraging us to share our insights.

In the session, they also read the reflections written by the students.

Both the sessions were very interesting and enjoyable. I learned many new things and developed a greater interest in reading. The sessions also helped me improve my vocabulary, thinking skills, and creativity. I am sincerely thankful to my mentors for making these sessions so interactive and inspiring. They encouraged me to read more, think deeply, and enjoy learning through books.
Thank you.
Deenshah Najam, 10thC

In today's session, we first listened to the My Good School Anthem, and afterwards we read and saw all the creative reflections written by the students. 

Brinda Ma'am's Session

In the first session by Brinda Ma'am, we enjoyed the story My Family and Other Animals by Gerald Durrell. We read the chapter "Conversation." This chapter was about the spring season. There were baby donkeys, tortoises, butterflies, and many more animals. We were also introduced to the book The Elizabethan Dramatists, which was recommended by Larry to his mother.

Session by Jugjiv Singh Sir

The second session by Jugjiv Singh Sir was marvellous, as Sir introduced us to new words and explained the chapter "Hiroya" from the book What You Are Looking For Is in the Library. Sir also asked many interesting questions.

These sessions were very effective and knowledgeable.
Talat Bano

Today's My Good School session was both enjoyable and meaningful.

Brinda Ma'am read My Family and Other Animals. In the story, Gerald's great-aunt planned to visit the family, but Lawrence and the other siblings did not want her to come. They kept suggesting excuses, and eventually the family shifted to a smaller house to politely avoid the visit. This made me smile because it reminded me of how many of us also ask our parents to make excuses when guests are about to arrive.

Later, Jugjiv Sir read about Hiroya, who felt his drawing of a bird was not good enough. However, the assistant librarian and Miss Komachi appreciated his artwork. This taught me that we are often too critical of ourselves, while others may see the beauty and effort in our work. It encouraged me to value my own efforts and believe in myself.
Ishika Singh
Class 10-B

Celebrating Nature, Family, and Self-Discovery Through Reading - Sunbeam School, Ballia

Today's sessions were highly engaging and enriching. Brinda Ma'am's beautiful reading and explanation of "Conversation" by Gerald Durrell helped me appreciate the beauty of nature and the warmth of family life. Jugjiv Singh Sir's interactive session introduced us to new vocabulary and made us think deeply through interesting questions.

Overall, I learned that reading becomes more meaningful when we observe, imagine, and connect with the ideas in the text.
Anurag Tripathi
TGT English

My Reflection: Chapter "Conversation" by Gerald Durrell

Reading this chapter honestly feels like looking at a warm, sun-drenched painting made of words. It instantly brings a smile to your face because of how alive and joyful it feels.

What I loved most is how beautifully Ma'am connects nature with family life. On one hand, you see the entire island waking up after a long winter—lambs playing, tortoises shaking off the dirt, and flowers blooming. On the other hand, you see this wonderfully chaotic family doing the exact same thing: stepping out onto their veranda to soak in the sun.

My Takeaway— In today's busy world, this chapter is a gentle reminder that happiness is actually very simple. It is found in enjoying a beautiful morning, waiting for a letter, and the sweet, messy noise of a family spending time together.

Mr. Ravi Thakur
TGT English

The reading session by Brinda Ma'am on "Conversation" was enjoyable. This chapter taught me that meaningful conversations make family relationships stronger. I learned that simple moments, such as sitting together, talking, reading letters, and sharing laughter, can create lasting memories. The chapter also reminded me to appreciate the beauty of nature and enjoy life's small pleasures instead of always rushing.

I also enjoyed the reading session because Brinda Ma'am read this chapter beautifully.
Pooja Pandey
TGT English


The Transformative Power of Reading and Reflection - Sunbeam School, Lahartara

Reading and reflecting help students develop a deeper understanding of both books and themselves. Reading broadens their knowledge, imagination, and vocabulary, while reflection encourages critical thinking and self-awareness. Together, these habits build confidence and improve communication skills. They also nurture empathy by helping students understand different perspectives and experiences. Reflective reading inspires students to connect lessons from books with real-life situations and make thoughtful decisions. Over time, these practices cultivate curiosity, creativity, and a lifelong love for learning. As a result, students grow into responsible, compassionate, and confident individuals.

Reflections Since 2021