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Saturday, 15 August 2026

My Family and Other Animals - Ravi Prakash


इस पुस्तक को पढ़कर मुझे प्रकृति, परिवार और पशु-पक्षियों के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला। लेखक ने अपने परिवार और जानवरों के अनुभवों को बहुत सरल और रोचक तरीके से बताया है। एक शिक्षक के रूप में मुझे लगा कि बच्चों को किताबों के साथ-साथ प्रकृति और अपने आसपास के जीव-जंतुओं को भी समझना चाहिए।

इस पुस्तक से मुझे यह सीख मिली कि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिज्ञासा बढ़ानी चाहिए। हमें बच्चों को पशु-पक्षियों के साथ दया और प्रेम से व्यवहार करना सिखाना चाहिए। परिवार के साथ समय बिताने और एक-दूसरे को समझने का महत्व भी समझ में आता है। प्रकृति बच्चों के लिए सीखने का एक अच्छा माध्यम हो सकती है।
मैं अपने विद्यार्थियों को पर्यावरण और जीव-जंतुओं की देखभाल के लिए प्रेरित करूँगा। यह पुस्तक मुझे एक संवेदनशील और बेहतर शिक्षक बनने की प्रेरणा देती है।
रवि प्रकाश 

Sunday, 21 September 2025

जंतुओं का आंतरिक जीवन - सनबीम ग्रामीण स्कूल

 जंतुओं के आंतरिक जीवन का अच्छे-बुरे के संदर्भ में अर्थ यह है कि जानवर वे व्यवहार करते हैं, जिन्हें अगर मनुष्य करें तो नैतिक रूप से गलत या बुरा माना जाएगा, जैसे प्रतिस्पर्धा या भोजन के लिए हत्या। लेकिन यह व्यवहार उनके लिए स्वाभाविक और विकासवादी रूप से अनुकूल होता है और उन्हें बुरा या गलत नहीं माना जाता। यह शब्द जंतुओं में नैतिकता की मानवीय अवधारणा को लागू करने की कोशिश करता है, जो उनके लिए प्राकृतिक और आवश्यक व्यवहारों पर लागू नहीं होता है।

नैन्सी मौर्या
कक्षा – 8

जंतुओं का आंतरिक जीवन उनकी भावनाओं (खुशी, दुःख, डर) और व्यवहार (शर्म, पश्चाताप, अनुशासन) से भरा होता है, जो उनके जीवित रहने और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। हालांकि उनमें मानवीय नैतिकता (सही–गलत) नहीं होती है, लेकिन वे अपने अनुभवों के आधार पर अच्छे या बुरे व्यवहार को सीखते और अपनाते हैं, जो उनके कल्याण पर निर्भर करता है।

धन्यवाद।
सीमा
कक्षा – 8

Monday, 28 July 2025

साथियों का दबाव: सोच और व्यवहार पर प्रभाव - सनबीम ग्रामीण स्कूल

साथियों का दबाव तब होता है जब कोई सहकर्मी या साथियों का समूह किसी व्यक्ति को किसी विशेष तरीके से सोचने या कार्य करने के लिए प्रभावित करता है या उस पर दबाव डालता है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण या धारणा को बदलकर उसे किसी विशिष्ट कार्य में सम्मिलित करना होता है।

सहकर्मी दबाव वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही समूह के सदस्य, अन्य सदस्यों को ऐसे व्यवहार या गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं, जिनमें वे स्वेच्छा से संलग्न नहीं होना चाहते।साथियों का दबाव समान रुचियों, अनुभवों या सामाजिक परिस्थितियों वाले समूहों के सदस्यों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता है। ऐसे समूह किसी व्यक्ति के विश्वासों, मूल्यों, धर्म और व्यवहार को प्रभावित करने की अधिक संभावना रखते हैं।

साथियों के दबाव का समाधान:

  • आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का विकास करें।
    दृढ़ता  का अभ्यास करें।
    सकारात्मक संबंधों के साथ-साथ सकारात्मक विचार भी बनाएं।
- नैंसी मौर्या (कक्षा 8)

सबसे मुश्किल भावना क्या है?
सबसे कठिन भावना क्रोध है, क्योंकि यह एक नकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जो असहायता या अपमान की भावना से उत्पन्न होती है। क्रोध व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी होता है।

दोस्ती कैसी होनी चाहिए?
अच्छी दोस्ती के लिए ईमानदारी, वफादारी और एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना आवश्यक है। सच्चे दोस्त हमेशा एक-दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते हैं और मुश्किल समय में साथ नहीं छोड़ते।

साथियों का दबाव
साथियों का दबाव तब होता है जब आपके दोस्त या सहकर्मी आपको ऐसा कुछ करने के लिए प्रेरित करते हैं, जो आप सामान्य रूप से नहीं करना चाहते, या फिर आपको किसी ऐसे कार्य से रोकते हैं, जिसे आप करना चाहते हैं। यह दबाव सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी, इस पर निर्भर करता है कि प्रभाव किस दिशा में ले जा रहा है।

– सीमा (कक्षा 8) 

Sunday, 27 July 2025

"विनम्रता की छाप" — गुरु नानक देव जी से सीखा जीवन का सार - स्वाति

 गुरु नानक देव जी के जीवन-यात्रा पर आधारित इस एपिसोड में "विनम्रता की छाप" विषय ने मेरे मन को बहुत गहराई से छुआ। अमरदीप सिंह जी के माध्यम से जब मैंने इस प्रसंग को सुना और देखा, तो मुझे यह महसूस हुआ कि विनम्रता केवल एक गुण नहीं, बल्कि एक शक्ति है—जो बिना शब्दों के भी दूसरों के दिल को छू जाती है।

गुरु नानक देव जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व और महानता तभी संभव है जब हम अपने अहंकार को त्यागकर, दूसरों की बातों को समझें, उनका सम्मान करें और सभी के साथ आदरपूर्वक व्यवहार करें

आज के समय में, जब हर कोई स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ में लगा है, यह एपिसोड हमें शांति, सच्चाई, और मानवता से भरे जीवन की ओर ले जाता है।
विनम्रता कोई दिखावा नहीं है, यह तो हमारे भीतर ही होती है — बस हमें खुद को पहचानने की आवश्यकता होती है। यही इंसान की असली सुंदरता है।

इस एपिसोड ने मेरे मन में एक विचार जगाया — अगर हम सभी अपने जीवन में थोड़ी-सी भी विनम्रता अपना लें, तो यह समाज और दुनिया एक सुंदर और शांतिपूर्ण स्थान बन सकती है।

यह एपिसोड केवल गुरु नानक देव जी के विचारों को जानने का माध्यम नहीं था, बल्कि उन्हें समझने और मनन करने का एक अवसर भी बना।

इस अनुभव से मैंने यह सीखा कि जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए झुकना ज़रूरी होता है — जैसे फलदार पेड़ हमेशा झुका होता है।
विनम्र व्यक्ति हर जगह स्वीकार किया जाता है, क्योंकि उसमें दूसरों को अपनाने की शक्ति होती है।
और सबसे बड़ी बात —
"विनम्रता की छाप शब्दों से नहीं, व्यवहार से झलकती है।"

 "विनम्रता एक सुगंध की तरह है, जो बिना दिखे हर दिल में जगह बना लेती है।" 

— स्वाति

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