Saturday, 29 August 2026

बाघ राजा से मिली सीख - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज के सेशन में कहानी पढ़ने के बाद हमने यह जाना कि हम जिस चीज से डरकर उसे अपने से दूर भगाने की कोशिश करते हैं, वह चीज जब हमसे दूर हो जाती है, तो हमें उसकी कमी महसूस होने लगती है। जैसा कि हमने जाना, कहानी में बाघ को देखते ही गाँव के लोगों के मन में डर पैदा हो गया। वे सब मिलकर उसे भगाने लगे। बाघ चला गया तो गाँव सुरक्षित हो गया, लेकिन कुछ समय बाद जब वही लोग जंगल की ओर देखे, तो जंगल का सूनापन महसूस किए और तब उन्हें उस बाघ की याद आने लगी, जिसे कभी वे अपना सबसे बड़ा खतरा समझ रहे थे।

हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है। कोई व्यक्ति हमें टोकता है, हमारी गलतियाँ बताता है या अनुशासन में रहने के लिए प्रेरित करता है, तो उस समय हमें उसका व्यवहार अच्छा नहीं लगता। लेकिन जब वह व्यक्ति हमारे साथ नहीं होता, तब उसकी कही हुई बातें और उसका अपनापन याद आता है।

एक शिक्षक के रूप में इस कहानी से मुझे यह सीख मिली कि विद्यालय में हर बच्चा अपनी क्षमता लेकर आता है, लेकिन उसे सही दिशा देने के लिए प्रेम, धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। किसी बच्चे को केवल उसकी कमजोरी देखकर कमजोर मान लेना वैसा ही है, जैसे जंगल में किसी जीव की शक्ति को केवल उसके बाहरी रूप से आँकना। बाघ मेरे लिए केवल एक कहानी का एक पात्र नहीं, बल्कि एक आईना है—जो पूछता है कि मेरे आस-पास कितना अधिकार है, यह महत्वपूर्ण नहीं; मैं उस अधिकार का उपयोग दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितना करता हूँ, यह अधिक महत्वपूर्ण है। एक बच्चे के जीवन में शिक्षक कभी-कभी उस बाघ की तरह दिखाई देता है—जो अनुशासन के कारण कठोर लगता है, लेकिन उसकी मौजूदगी बच्चों के जीवन में दिशा, सुरक्षा और सीख लेकर आती है।

गुलाबी

आज हम लोगों को GSA Class में बाघ राजा की कहानी सुनाई गई। एक जंगल में एक खूंखार शेर रहता था। जंगल के पास एक गाँव था, जिसके लोग शेर से बहुत डरते थे। एक दिन गाँववालों ने शेर को मारने का फैसला किया और किसी तरह उसे बंदूकों से घायल कर दिया। घायल शेर नदी में गिर गया और बहते-बहते दूर चला गया। कुछ समय बाद गाँववालों को एहसास हुआ कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। उन्हें समझ आया कि शेर उनके लिए एक तरह से रक्षक भी था, क्योंकि जब कोई इंसान जंगल के पेड़-पौधे काटने आता, तो शेर के डर से भाग जाता था। तब गाँववालों को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमारे पास जो चीजें या लोग होते हैं, हमें उनकी कद्र अक्सर तब समझ आती है, जब वे हमसे दूर चले जाते हैं। इसलिए हमें किसी की महत्ता खोने के बाद नहीं, बल्कि उसके हमारे पास रहते हुए ही समझनी चाहिए।

अभय कुमार वर्मा, कक्षा 8

सुप्रभात एवं जय हिंद। आज की GSA Class में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था बाघ राजा। इस कहानी के माध्यम से हमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि आज के समय में जंगलों की कटाई और वन्यजीवों जैसे शेर, बाघ आदि जानवरों को मारना इंसान की बहुत बड़ी भूल है। यदि धरती से जंगली जानवर खत्म हो गए, तो मनुष्य का जीवित रहना असुरक्षित हो जाएगा। शेर और बाघ जैसे हिंसक जानवर शाकाहारी जानवरों, हिरण, जंगली सूअर का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रण में रखते हैं। अगर बाघ नहीं होंगे, तो शाकाहारी जानवरों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि वे गाँव और खेतों में घुसकर पूरी फसलें नष्ट कर देंगे। इससे भुखमरी फैल जाएगी। जब प्राकृतिक शिकारी जैसे बाघ, चील, शेर आदि जानवर नहीं रहेंगे, तो बीमार और सड़े जानवरों को खाने वाला कोई नहीं होगा। इससे पर्यावरण दूषित होगा और मनुष्य अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाएँगे। कहानी से हमें यह मुख्य सीख मिलती है कि जंगल और जानवर इंसान के दुश्मन नहीं, बल्कि हमारे जीवन के रक्षक हैं। शेर, बाघ आदि जानवरों को मारकर मनुष्य खुद अपनी मौत को दावत दे रहा है।

धन्यवाद
नाम: स्वाति सिंह, कक्षा 8

जय हिंद।

आज की GSA Class में एक कहानी को पूरा किया गया, जिसका नाम बाघ राजा था। इस कहानी में बताया गया कि एक जंगल में बाघ को मारकर भागने की कोशिश की जा रही थी। बाघ को चोट पहुँचने पर वह नदी में गिरा। नदी के बहाव के कारण वह एक रेतीले स्थान पर पहुँच गया, जिससे गाँव वालों को लगा कि बाघ की मृत्यु हो गई है। कुछ दिनों तक तो सब ठीक चल रहा था, परंतु कुछ दिनों बाद लोगों को एहसास हुआ कि उन्होंने खुद के लिए खुद ही मुसीबत बुलाई है। उन्हें अंत में एहसास हुआ कि उन्होंने अपने रक्षक को खुद ही मार दिया। हाँ, जंगली जानवर भी अपने जंगल के साथ-साथ अपने आसपास के स्थान को भी सुरक्षित करते हैं। जिस प्रकार कहानी में बाघ ने शिकारी और स्थान को हड़पने वाले लोगों से जंगल और गाँव को सुरक्षित कर रखा था, उन्हें एहसास हुआ कि बाघ के चले जाने से जंगल के छोटे एवं खतरनाक जंतुओं को भी शिकारी मार सकते हैं। वहाँ के पेड़ों को काट सकते हैं तथा हम सभी को पता है कि पेड़ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। पेड़ों से ही हमें जीवित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऑक्सीजन मिलती है, फल मिलते हैं और हवा प्राप्त होती है। इससे जीवों को अत्यधिक नुकसान पहुँचेगा। उन्हें अपना घर खोना पड़ेगा।

सीख :- हमें हर उस वस्तु की हमारे जीवन में कीमत उसके जाने के बाद पता चलती है। इससे हमारे बीच, मतलब जंगल में रहने वाले जीव, विलुप्त हो जाते हैं। इससे हमारे पर्यावरण को भी अत्यधिक नुकसान पहुँचता है।

धन्यवाद
प्रिया पाल, कक्षा 8

 

Exploring Family, Nature and Relationships - Sunbeam School Mau

Session's Feedback

The session on “My Family and Other Animals” with Brinda Ghosh ma'am was engaging, insightful, and enriching. The session beautifully explored the themes of family, relationships, nature, and the fascinating bond between humans and animals. Brinda Ghosh’s lively, captivating narration made the discussion enjoyable and easy to connect with.

The session encouraged us to look at the text from different perspectives and helped us appreciate the author’s unique way of portraying family and nature. Overall, it was an interactive and thought-provoking session that deepened our understanding of the work and left us with many interesting insights.

Regards,
Srishti Rai

I really enjoyed the session on “My Family and Other Animals” by Brinda Ghosh ma'am. It was fun, interactive, and helped me better understand the book. I loved listening to the interesting insights and stories shared during the session. Overall, it was a wonderful and enriching experience!

Sanyukta Gupta
Monitor- V Amazing

The session was enriching and practical. Gerald Durrell’s words reminded me that slowing down helps us notice the extraordinary in ordinary routines, just as I pause during assemblies to observe gratitude and discipline in small gestures. Michiko Aoyama’s story of rice balls and crabs echoed how everyday choices, even in food or care, reflect empathy and respect, values I try to weave into classroom practices and family life. Overall, the readings were not just literary; they were mirrors to daily living, urging us to stay attentive, empathetic, and open-minded in our roles as educators and individuals.

Ravina

Reflections Since 2021