Sunday, 27 September 2026

Lessons from Gandhi Ji’s Visit to Jamshedpur- Sunbeam Gramin school

1925 में महात्मा गांधी जी का जमशेदपुर आगमन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि समाज और देश को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक अवसर था। गांधी जी का मानना था कि देश की प्रगति केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि श्रमिकों, आम लोगों और समाज के हर वर्ग के सम्मान और सहयोग से होती है।

जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में उनका आना हमें यह सीख देता है कि विकास के साथ-साथ मानवता, समानता और श्रम का सम्मान भी आवश्यक है। गांधी जी के विचारों से यह समझ आती है कि एक सच्चा परिवर्तन तभी संभव है, जब हम अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें।

आज के समय में भी उनका यह संदेश प्रासंगिक लगता है कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए केवल सुविधाएँ नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, अनुशासन, ईमानदारी और आपसी सम्मान की आवश्यकता है। उनके जमशेदपुर आगमन की घटना हमें इतिहास जानने के साथ-साथ अपने वर्तमान को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देती है।
सुनीता त्रिपाठी

आज हमने GSA क्लास में सीखा कि “जमशेदपुर में गांधी जी” और “हमारे समय का टाइटन” की कहानियाँ हमें मेहनत, सच्चाई, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देती हैं।

जमशेदपुर में महात्मा गांधी जी सादगी, सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। एक बार वे जमशेदपुर गए। वहाँ उन्होंने मजदूरों और लोगों से मुलाकात की। गांधी जी ने लोगों को ईमानदारी, एकता और मेहनत का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और देश की प्रगति में मजदूरों और मेहनतकश लोगों का बहुत बड़ा योगदान होता है।

गांधी जी का जीवन हमें सिखाता है कि हमें अपने काम को ईमानदारी से करना चाहिए और सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने पर जोर दिया।

“हमारे समय का टाइटन” हमें ऐसे महान व्यक्ति के बारे में बताता है, जिसने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से समाज और देश के विकास में योगदान दिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सफलता पाने के लिए मेहनत, धैर्य और दृढ़ संकल्प बहुत जरूरी हैं।

इन दोनों कहानियों से हमें यह सीख मिलती है कि हमें ईमानदार, मेहनती और जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए। हमें अपने देश और समाज की भलाई के लिए हमेशा अच्छा काम करने का प्रयास करना चाहिए।
शिवांगी सिंह, 7

आज के GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम “जमशेदपुर में गांधी जी” था। इस कहानी से हमें मुख्य सीख मिलती है कि जमशेदपुर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यात्राओं से श्रम का सम्मान, शांतिपूर्वक संवाद और समरसता की गहरी सीख मिलती है।

गांधी जी ने 1925, 1934 और 1940 में जमशेदपुर का दौरा किया था। गांधी जी ने आर. डी. टाटा और उनके साथियों के साथ बैठक की और मजदूरों की समस्याओं का सम्मानजनक समाधान करवाते हुए प्रबंधन और यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता कराया।

इस कहानी से हमें मुख्य सीख मिलती है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। समाज के विकास में श्रमिकों और उनके पसीने का योगदान उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि किसी उद्योगपति का होता है।
स्वाति सिंह, 8

आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम “जमशेदपुर में गांधी जी” था। इस कहानी से सीख मिलती है कि महात्मा गांधी सादगी, सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। गांधी जी ने 1940 में जमशेदपुर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने मजदूरों और अन्य लोगों से मुलाकात की।

गांधी जी के जीवन से हमें सीखने को मिलता है कि हमें सत्य, ईमानदारी और पूरी लगन से काम करना चाहिए। हमें सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह अमीर हो या गरीब, चाहे वह ऊँची जाति का हो या नीची जाति का। हमें सभी की मदद करनी चाहिए।

यह कहानी हमें मेहनत, सच्चाई, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देती है। महात्मा गांधी जी ने कहा था कि देश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकार का ही नहीं, बल्कि एक मजदूर का भी हाथ होता है। देश को आगे बढ़ाने में आम मजदूरों का भी बहुत बड़ा योगदान है।
अंशिका वर्मा, 8

आज की GSA क्लास में हमें एक कहानी दिखाई गई, जिसका नाम “जमशेदपुर में गांधी जी” है। जब गांधी जी 1925 में जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट देखने आए थे, तो जमशेदजी टाटा और उनके लोगों ने उनके बहुत बड़े तरीके से स्वागत करने की तैयारी की थी। पर गांधी जी तीसरे दर्जे के डिब्बे में साधारण धोती में आए। उन्होंने कहा, “मैं यहाँ मालिकों से नहीं, मजदूरों से मिलने आया हूँ।”

कहानी का सबसे बड़ा संदेश है कि कंपनी मशीनों से नहीं, मजदूरों के पसीने से चलती है। इसलिए टाटा ने मजदूरों के लिए 8 घंटे काम, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएँ सबसे पहले शुरू कीं।

बड़े लोग दिखावे से नहीं बनते। टाटा जैसा इतना बड़ा साम्राज्य होने के बाद भी उन्होंने गांधी जी की सादगी का सम्मान किया। जमशेदजी टाटा जी ने कहा, “जो समुदाय से कमाते हो, उसका कई गुना समुदाय को लौटाओ।” गांधी जी के स्वदेशी विचार और टाटा के इस विचार का मेल ही जमशेदपुर है।

गांधी जी ने वहाँ मजदूरों के साथ बैठकर चरखा चलाया और कहा, “अपने हाथ के काम पर गर्व करो।”
शिवानी यादव,  7

आज की कक्षा में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था “जमशेदपुर में गांधी जी”। टाटा स्टील के मजदूरों और प्रबंधन के बीच चल रहे विवाद और हड़ताल को सुलझाने के लिए दीनबंधु सी. एफ. एंड्रयूज (तत्कालीन लेबर लीडर) के आमंत्रण पर गांधी जी यहाँ आए थे।

उन्होंने बिष्टुपुर स्थित यूनाइटेड क्लब (तत्कालीन टिस्को इंस्टीट्यूट) में 20 हजार से अधिक मजदूरों की एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने मजदूरों और प्रबंधन (आर. डी. टाटा) के बीच ऐतिहासिक समझौता कराया, जिससे देश के कॉरपोरेट जगत में पहली बार औद्योगिक शांति और सामंजस्य का एक आदर्श स्थापित हुआ।

इस यात्रा के दौरान बापू ने गर्व से कहा था, “मुझे मजदूर होने पर गर्व है” और टाटा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा था कि “टाटा साहस की भावना का प्रतिनिधित्व करता है।”
श्रुति पटेल, 8


 

Friday, 25 September 2026

Highway to Swades: Learning the Values of Unity and Responsibility - Ms. Rekha Sharma

As a teacher, I found this reading deeply meaningful because it reminded me that education is not only about completing a syllabus but also about helping students understand life, society, and their responsibilities towards others. The comparison of the Ganga with India's civilisation and the raft with the Republic of India made me reflect on how people from different languages, religions, cultures, and backgrounds can still move forward together when they build trust, empathy, and a shared sense of responsibility. I particularly connected with the idea that everyone on the raft has a role in keeping it afloat. In my classroom too, I see my students as individuals with different abilities, experiences, and ways of thinking, and I feel that my role is to bring them together rather than make them feel different from one another.

This passage also made me realise that unity does not mean that everyone has to be the same; rather, it means respecting our differences while working towards a common purpose. As a teacher, I would use such stories and real-life experiences to encourage my students to listen to one another, appreciate diversity, help those who are struggling, and understand that a society's progress depends on collective effort.

Overall, the reading has made me reflect on my responsibility as a teacher to develop not only knowledgeable students but also compassionate, responsible, and cooperative human beings.

Ms. Rekha Sharma
Sunbeam School Mau
 

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