Saturday, 19 September 2026

Highway to Swades – अध्याय 1: हमारे भारत पर विद्यार्थियों की चिंतनात्मक प्रतिक्रियाएँ - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज की कक्षा में बताया गया कि सन् 2002 में Yi का क्या उद्देश्य था। Yi की शुरुआत के बाद इस बात पर चर्चा और विचार-विमर्श किया गया कि देश के युवा भारतीय क्या भूमिका निभा सकते हैं और Yi किस प्रकार कार्य कर सकती है। आज का विषय था कि अपने देश को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाए।

Yi के गठन से हमारे देश के युवाओं को काफी लाभ मिला। हमारे देश के व्यापारी एवं बड़े-बड़े बिजनेसमैन नेटवर्किंग के माध्यम से एक शहर से दूसरे शहर से जुड़े। इससे समाज को भी लाभ मिला। बाढ़ और कोरोना जैसी आपदाओं के समय समाज की काफी मदद की गई। स्कूलों में बच्चों के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

आज की कहानी में यह दिखाया गया कि किस प्रकार हमारे देश के प्रधानमंत्री देश के विकास के लिए तत्पर रहते हैं। साथ ही, गंगा के घाटों के विकास के बारे में भी चर्चा की गई।
धन्यवाद।
अशोक कुमार मौर्य

आज की कक्षा में बताया गया कि Highway to Swades पुस्तक के पहले अध्याय में हमारे भारत के बारे में बताया गया है। यह लेख सन् 2004 का है, जब देश में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल थी। भाजपा की सरकार के बाद कांग्रेस के नेतृत्व में नई सरकार बनी, जिसमें कई अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल शामिल थे। लेखिका स्वयं 25 वर्ष की युवा महिला थीं और इस विरोधाभास को देखकर हैरान थीं।

वह हरिद्वार और ऋषिकेश की यात्रा पर हैं। वहाँ वह गंगा के दो रूपों को देखती हैं—

  1. वाराणसी की गंगा – शांत, मोक्ष देने वाली और भारत की पुरानी सभ्यता जैसी।

  2. ऋषिकेश की गंगा – तेज, ऊर्जा से भरी और भारत के युवा भविष्य जैसी।

ट्रेन में एक यात्री उनसे पूछता है—“भारत के विचार को पुनर्जीवित करने से क्या मतलब है? क्या वह मर गया है?”

यही इस लेख का सबसे बड़ा सवाल है। लेखिका कहना चाहती हैं कि भारत का विचार केवल राजनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है। यह एक सभ्यता और संस्कृति है, जो हमेशा बदलती रहती है, लेकिन कभी समाप्त नहीं होती।

इसी विचार को जीवित रखने के लिए वह ‘Young Indians’ जैसे युवा संगठन की आवश्यकता महसूस करती हैं, ताकि हर क्षेत्र के युवा देश के बारे में सोचें और उसके विकास में योगदान दें।
धन्यवाद।
साक्षी पटेल. कक्षा 8

आज की GSA कक्षा में Highway to Swades पुस्तक के पहले पाठ ‘हमारे भारत’ के बारे में बताया गया। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य यह समझाना है कि हमें अपने देश से केवल भावनात्मक रूप से ही नहीं जुड़ना चाहिए, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और विकास के लिए निरंतर प्रयास भी करना चाहिए।

यह पाठ हमें विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता छोड़कर अपने देश में बनी वस्तुओं अर्थात् स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे देश के विकास में योगदान दिया जा सके।

जीवन क्षणभंगुर है और एक न एक दिन इसका अंत होना ही है। इसलिए अपने कर्तव्यों को निभाते हुए देश के काम आना ही जीवन को सार्थक बनाता है। कविता का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि जिस मनुष्य के हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, उसका हृदय हृदय नहीं, बल्कि पत्थर के समान है।
धन्यवाद।
स्वाति सिंह, कक्षा 8

आज हमें Highway to Swades नामक पुस्तक के पाठ 1 में ‘हमारे भारत’ के बारे में बताया गया। इसे सुनकर मुझे अपने प्यारे भारत के बारे में और अधिक सीखने का अवसर मिला।

मुझे माँ गंगा नदी का उल्लेख बहुत अच्छा लगा। ऋषिकेश में गंगा की तेज और ऊर्जावान धारा से हमें यह सीखने का अवसर मिलता है कि हमें भी चुनौतियों के बावजूद कभी डरना नहीं चाहिए और उनका डटकर सामना करना चाहिए।

भारत को और भी आगे बढ़ाने के लिए हमें केवल सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि हर व्यक्ति सच्चा और ईमानदार हो जाए तथा अपने कर्तव्यों का पालन करे, तो यह भी देश को आगे बढ़ाने में एक बड़ा योगदान होगा।
धन्यवाद!
प्रिया पाल,कक्षा 8

आज हमें Highway to Swades पुस्तक के पहले अध्याय के बारे में बताया गया। इस अध्याय में हमारे भारत की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला गया है।

उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार बन चुकी थी। अलग-अलग विचारधाराओं वाली कई पार्टियाँ एक साथ आकर इस सरकार का गठन कर चुकी थीं। लेखिका यह समझने की कोशिश कर रही थीं कि मार्क्सवादी वामपंथ की विचारधारा उस सरकार का हिस्सा कैसे थी, जिसका नेतृत्व भारत के प्रमुख बाजार समर्थक सुधारक और प्रधानमंत्री एवं अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह कर रहे थे।

अपने देश से गहरा प्रेम करने वाली एक युवा महिला के रूप में, लेखिका उस समय अपने देश में अनेक सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विसंगतियों को देख रही थीं।

हरिद्वार से हमें लेकर चली बस अब ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला पुल के पास से गुजर रही थी। लेखिका ने इससे पहले गंगा को केवल वाराणसी में देखा था। वहाँ गंगा शांत गति से बहती है और मुक्ति का द्वार प्रतीत होती है। लेकिन ऋषिकेश में, हिमालय में अपने उद्गम के अधिक निकट, वह ऊर्जा के एक प्रवाह की तरह बहती है और अपने संपर्क में आने वाली हर चीज़ को बदल देती है। मानसून के अंतिम दिनों में उसकी अलौकिक सुंदरता उसके प्रचंड वेग से मेल खाती है। उसका जल उमड़ता हुआ बह रहा था।
धन्यवाद।
अंशिका वर्मा, कक्षा 8

आज की कक्षा में Highway to Swades पुस्तक के पहले अध्याय ‘हमारे भारत’ के बारे में बताया गया। इस अध्याय के माध्यम से भारत की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला। गंगा के विभिन्न रूपों का वर्णन बहुत सुंदर और प्रेरणादायक लगा। वाराणसी में गंगा शांत और मोक्षदायिनी दिखाई देती है, जबकि ऋषिकेश में वह तेज, ऊर्जावान और परिवर्तनकारी रूप में दिखाई देती है।

ऋषिकेश में गंगा की तेज धारा हमें यह संदेश देती है कि हमें भी जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
धन्यवाद।
शिवांगी सिंह, कक्षा 7

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