आज के सेशन में “My Family and Other Animals” पुस्तक के "दीवार में दुनिया" पाठ से हमें प्रकृति, पशु-पक्षियों और मनुष्य के बीच के गहरे संबंध को समझने का अवसर मिला। इस अध्याय में लेखक ने अपने परिवार और आसपास के जीव-जंतुओं के साथ बिताए गए अनुभवों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। यह पाठ केवल मनोरंजन ही नहीं करता, बल्कि संवेदनशीलता, अवलोकन क्षमता और पर्यावरण प्रेम की भावना भी विकसित करता है।
इस अध्याय से हमने यह सीखा कि प्रकृति के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान रखना चाहिए। लेखक का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि यदि हम प्रकृति के करीब रहें, तो जीवन अधिक आनंदमय और संतुलित बन सकता है।
शिक्षण की दृष्टि से यह अध्याय छात्रों में अवलोकन कौशल, रचनात्मक सोच, भाषाई अभिव्यक्ति और संवेदनशीलता का विकास करता है। विद्यार्थी अपने आसपास के जीव-जंतुओं के बारे में जानने, उनके व्यवहार को समझने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित होते हैं।
एक शिक्षक के रूप में इस अध्याय से हमने यह जाना कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों और प्रकृति से जुड़ी हुई है। इससे बच्चों में समग्र विकास संभव है।
हम दीवार को हमेशा रोकने वाली चीज मानते हैं, पर Gerry का चैप्टर सोचने पर मजबूर कर देता है। ईंट और सीमेंट से बनी दीवार को हम बेजान समझते हैं, लेकिन उसमें पूरी दुनिया बसती है — चींटियों का रास्ता, छिपकली का घर, मकड़ी का जाल, सब वहीं चल रहा होता है। हम दीवार से दूरियां बनाते हैं, पर प्रकृति हम सबको उसमें जोड़ देती है।
धन्यवाद
आज की कक्षा में हम लोगों ने एक टॉपिक पढ़ा, जिसका नाम था “सबसे खूबसूरत”। हम लोगों ने “सबसे खूबसूरत” का अर्थ भी जाना। यह टॉपिक एक बच्चे और उसकी मां पर आधारित है। इस टॉपिक में एक छोटा सा बच्चा था, जिसका नाम सुरेश था। वह बहुत कमजोर था और बोल नहीं पाता था।
एक दिन सुरेश को कुछ बच्चे पत्थरों से मार रहे थे। यह सब देखकर एक व्यक्ति उन बच्चों के पास गया। बच्चे उस व्यक्ति को देखकर भाग गए। वह व्यक्ति सुरेश को उसके घर ले गया। घर जाने के बाद वह एक कोने में जाकर बैठ गया। सुरेश की मां ने उस व्यक्ति को चाय दी। तभी सुरेश के पापा आ गए, जो सुरेश को पसंद नहीं करते थे, पर सुरेश की मां उसे बहुत ज्यादा पसंद करती थीं।
अब वह व्यक्ति सुरेश के घर कभी-कभी आता था, जिससे सुरेश बहुत खुश होता था और उसके साथ खेलता था। इससे सुरेश में कुछ बदलाव हुआ। यह सब देखकर उसकी मां बहुत खुश हुई।
शिवानी, कक्षा – 7

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