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Sunday, 10 May 2026

छोटी चीजों में छिपी बड़ी सीख - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज के सेशन में “My Family and Other Animals” पुस्तक के "दीवार में दुनिया" पाठ से हमें प्रकृति, पशु-पक्षियों और मनुष्य के बीच के गहरे संबंध को समझने का अवसर मिला। इस अध्याय में लेखक ने अपने परिवार और आसपास के जीव-जंतुओं के साथ बिताए गए अनुभवों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। यह पाठ केवल मनोरंजन ही नहीं करता, बल्कि संवेदनशीलता, अवलोकन क्षमता और पर्यावरण प्रेम की भावना भी विकसित करता है।

इस अध्याय से हमने यह सीखा कि प्रकृति के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है। हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान रखना चाहिए। लेखक का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि यदि हम प्रकृति के करीब रहें, तो जीवन अधिक आनंदमय और संतुलित बन सकता है।

शिक्षण की दृष्टि से यह अध्याय छात्रों में अवलोकन कौशल, रचनात्मक सोच, भाषाई अभिव्यक्ति और संवेदनशीलता का विकास करता है। विद्यार्थी अपने आसपास के जीव-जंतुओं के बारे में जानने, उनके व्यवहार को समझने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित होते हैं।

एक शिक्षक के रूप में इस अध्याय से हमने यह जाना कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों और प्रकृति से जुड़ी हुई है। इससे बच्चों में समग्र विकास संभव है।

अंततः, यह अध्याय हमें सिखाता है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध प्रेम, समझ और जिम्मेदारी पर आधारित होना चाहिए।

गुलाबी, सनबीम ग्रामीण स्कूल 

हम दीवार को हमेशा रोकने वाली चीज मानते हैं, पर Gerry का चैप्टर सोचने पर मजबूर कर देता है। ईंट और सीमेंट से बनी दीवार को हम बेजान समझते हैं, लेकिन उसमें पूरी दुनिया बसती है — चींटियों का रास्ता, छिपकली का घर, मकड़ी का जाल, सब वहीं चल रहा होता है। हम दीवार से दूरियां बनाते हैं, पर प्रकृति हम सबको उसमें जोड़ देती है।

Larry को हर चीज में डर दिखाई देता है, पर Gerry को हर छोटी चीज में एक नई कहानी मिल जाती है। हम बोर होते हैं और सोचते हैं कि मजा कहीं और है, जबकि Gerry के पास कुछ नहीं था, फिर भी वह खुश था क्योंकि उसने छोटी चीजों को देखना सीख लिया था। शायद दीवार तोड़नी नहीं है, बस उसे देखने का नजरिया बदलना है। वह जगह, जो हमें खाली लगती है, अक्सर वही सबसे ज्यादा भरी हुई होती है और यही बात Gerry हमसे कहना चाहता था।
धन्यवाद

प्रिया पाल, कक्षा – 8

आज की कक्षा में हम लोगों ने एक टॉपिक पढ़ा, जिसका नाम था “सबसे खूबसूरत”। हम लोगों ने “सबसे खूबसूरत” का अर्थ भी जाना। यह टॉपिक एक बच्चे और उसकी मां पर आधारित है। इस टॉपिक में एक छोटा सा बच्चा था, जिसका नाम सुरेश था। वह बहुत कमजोर था और बोल नहीं पाता था।

एक दिन सुरेश को कुछ बच्चे पत्थरों से मार रहे थे। यह सब देखकर एक व्यक्ति उन बच्चों के पास गया। बच्चे उस व्यक्ति को देखकर भाग गए। वह व्यक्ति सुरेश को उसके घर ले गया। घर जाने के बाद वह एक कोने में जाकर बैठ गया। सुरेश की मां ने उस व्यक्ति को चाय दी। तभी सुरेश के पापा आ गए, जो सुरेश को पसंद नहीं करते थे, पर सुरेश की मां उसे बहुत ज्यादा पसंद करती थीं।

अब वह व्यक्ति सुरेश के घर कभी-कभी आता था, जिससे सुरेश बहुत खुश होता था और उसके साथ खेलता था। इससे सुरेश में कुछ बदलाव हुआ। यह सब देखकर उसकी मां बहुत खुश हुई।

शिक्षा अध्याय 9 हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें किसी का मजाक नहीं बनाना चाहिए और हमें कभी भी किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाहिए। न तो उसे मारना चाहिए। हमें सबकी सहायता करनी चाहिए और उन्हें हमेशा हौसला देना चाहिए।

शिवानी,  कक्षा – 7


Sunday, 31 August 2025

फलता का असली सूत्र - Swati Tripathi

"Having a goal and understanding the situation are not enough"

“लक्ष्य होना और स्थिति को समझना”— ये दोनों चीज़ें ज़रूरी तो हैं, लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं हैं। मान लीजिए आपके पास एक लक्ष्य है और आप परिस्थिति को अच्छे से समझ भी रहे हैं, फिर भी अगर: योजना (planning) नहीं है,लगातार प्रयास (consistent action) नहीं है, अनुशासन और धैर्य (discipline & patience) नहीं है, तो केवल लक्ष्य और समझ आपको मंज़िल तक नहीं पहुँचाएँगे।

उदाहरण: क्रिकेट खिलाड़ी को पता है कि मैच जीतना है (goal) और पिच की हालत भी समझ में आ गई (situation), लेकिन अगर उसने प्रैक्टिस नहीं की, सही रणनीति नहीं बनाई और मेहनत नहीं की, तो जीतना मुश्किल हो जाएगा।

यानी असली सफलता के लिए लक्ष्य + स्थिति की समझ + योजना + मेहनत + निरंतरता। इसके अलावा कई ऐसी बाते है जो हमे होने लक्ष्यों को प्राप्त करने मव मदद करती है जैसे-

Action plan + Self assessment + flexibility + efforts  इन सब बातो से हम प्रभावी ढंग से कार्य कर सकते है।

Swati Tripathi 
Sunbeam Gramin School

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