Saturday, 1 August 2026

बुद्धिमानी, धैर्य और परोपकार की प्रेरक कहानी- Sunbeam Gramin School

अध्याय — मेरा परिवार और अन्य जानवर

प्रकृति हमारे जीवन की सबसे बड़ी शिक्षिका है। यदि हम जिज्ञासा और संवेदनशीलता के साथ प्रकृति को देखें, तो हम उससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह अध्याय केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि परिवार के प्रेम, सहयोग, हास्य और आपसी समझ का सुंदर चित्रण भी है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि परिवार का साथ जीवन की कठिनाइयों को भी सरल बना देता है।

साथ ही, यह अध्याय हमें प्रत्येक जीव का सम्मान करने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। सभी जीव-जंतु पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और उनकी सुरक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
धन्यवाद।
- मनोज कुमार

आज की  कक्षा में "सदाबहार कौआ" नामक कहानी सुनाई गई।
एक घने जंगल में एक कौआ रहता था। उसका नाम सदाबहार था। वह बहुत बुद्धिमान, मेहनती और दयालु था। वह हमेशा दूसरों की मदद करता था, इसलिए जंगल के सभी पक्षी उसे बहुत पसंद करते थे।
एक दिन जंगल में भीषण गर्मी पड़ने लगी। तालाब और छोटे-छोटे गड्ढे सूख गए। सभी पक्षी प्यास से परेशान हो गए। सदाबहार पानी की खोज में उड़ते-उड़ते एक पुराने पेड़ के पास पहुँचा। वहाँ उसे एक घड़ा मिला, जिसमें थोड़ा-सा पानी था। लेकिन पानी इतना नीचे था कि उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँच सकती थी।
सदाबहार ने हार नहीं मानी। उसने आसपास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ उठाकर एक-एक करके घड़े में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया। उसने पहले स्वयं पानी पिया और फिर अपने सभी साथियों को बुलाकर उन्हें भी पानी पिलाया।
सभी पक्षियों ने सदाबहार की बुद्धिमानी, धैर्य और दयालुता की बहुत प्रशंसा की। उस दिन से पूरे जंगल में उसकी मिसाल दी जाने लगी।
शिक्षा:
बुद्धि, धैर्य और परिश्रम से हर कठिनाई का समाधान निकाला जा सकता है।
- शिवानी सिंह, कक्षा: 7

आज हमारी GSA कक्षा में हमें 'सदाबहार कौआ' की एक अत्यंत प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद कहानी सुनाई गई। इस कहानी का मुख्य पात्र 'सदाबहार' नाम का एक कौआ है, जो अपनी बुद्धिमानी, मेहनत और दयालु स्वभाव के कारण पूरे जंगल में प्रसिद्ध था।
कहानी में बताया गया कि जब भीषण गर्मी के कारण जंगल के सभी तालाब और जलस्रोत सूख गए तथा सभी पक्षी प्यास से व्याकुल हो गए, तब सदाबहार ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उसे एक घड़ा मिला, जिसमें थोड़ा-सा पानी था, लेकिन वह उसकी चोंच की पहुँच से नीचे था। उसने हार मानने के बजाय एक-एक करके कंकड़ घड़े में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे पानी का स्तर ऊपर आ गया। उसने पहले स्वयं पानी पिया और फिर अपने साथियों को भी बुलाकर पानी पिलाया।
इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, बुद्धिमानी और शांत मन से काम लेने पर हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। साथ ही, सच्ची बुद्धिमानी वही है, जो केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की सहायता करने में भी काम आए।
- रक्षित, कक्षा – 8

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