Sunday, 5 July 2026

Finding Direction Through Books and Learning - Ishika Singh


In today’s session of My Good School, Jugjiv Sir started a new chapter from the book What You Are Looking For Is in the Library. We learned about a 30-year-old man named Hiroya, who was a NEET (Not in Employment, Education, or Training). He was an introverted person who loved reading manga and found it difficult to talk to others.

During the session, we also discussed manga, graphic novels in India, and the challenges faced by many NEETs who struggle to find jobs. Jugjiv Sir emphasized the importance of developing our skills for a better future.

In the story, Hiroya visited a library and met Miss Komachi. He liked the peaceful atmosphere of the library and shared his struggles with finding work related to illustration. This chapter taught us that guidance, books, and continuous learning can help people find direction in life.

Ishika Singh, 10th B

सबसे अनमोल उपहार: सद्कर्मों की विरासत - सनबीम ग्रामीण स्कूल

आज की कहानी ने यह एहसास कराया कि मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसके धन, पद या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और अच्छे कर्मों से होती है। "मृतक का उपहार" कहानी ने मेरे मन को गहराई से स्पर्श किया। इसने यह एहसास कराया कि जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हमारे अच्छे कर्म हैं।

प्रेम, करुणा और दूसरों के लिए किया गया निस्वार्थ सहयोग ही मनुष्य की सच्ची पहचान है। मनुष्य भले ही इस संसार से चला जाए, लेकिन उसके सद्कर्म, संस्कार और नेक विचार हमेशा लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं।

इस कहानी ने मुझे प्रेरित किया कि मैं ऐसा जीवन जिऊँ, जिससे मेरे जाने के बाद भी लोग मुझे मेरे अच्छे व्यवहार, सेवा और मानवता के लिए याद करें। वास्तव में, यही किसी व्यक्ति का सबसे अनमोल उपहार है। यही उसकी सबसे सुंदर विरासत भी है।

यह सत्र मेरे हृदय को गहराई से छू गया और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा दे गया।
सुनीता त्रिपाठी

आज की जीएसए क्लास में हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम था "मृतक का उपहार"। इस कहानी के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि जो आदमी जैसा दिखता है, वह वैसा होता नहीं है। यदि हम पूरी निष्ठा और रुचि के साथ किसी कार्य को करते हैं, तो हमारा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि फल का विचार किए बिना किया गया कार्य हमेशा उत्तम होता है। जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आए, हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए। इस कहानी से हमें यह मुख्य सीख मिलती है कि दूसरों की मदद करना, अपनी मेहनत पर विश्वास रखना और निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य हमेशा फलदायी होता है। विपत्ति से हार मानने के बजाय धैर्य और लगन से काम करने पर सफलता अवश्य मिलती है।

धन्यवाद।
स्वाति सिंह, कक्षा – 8

आज की GSA क्लास में मनीषा मैम द्वारा हमें एक कहानी सुनाई गई, जिसका नाम "मृतक का उपहार" है। शुरू में मुझे लगा कि मृतक का उपहार—मरा हुआ व्यक्ति हमें क्या ही उपहार दे सकता है? पर कहानी सुनने के बाद मुझे मेरे सवाल का जवाब मिला कि मरा हुआ व्यक्ति भी हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है।

कहानी में, सर्दी की रात में जब कहानी का पात्र नत्थू कहता है कि मरा हुआ व्यक्ति किसी काम का नहीं होता, पर घनश्याम सिंह की कहानी उसे गलत साबित कर देती है कि मरने वाला व्यक्ति भी अपने पीछे बहुत कुछ उपहार के रूप में दे जाता है।

उपहार सिर्फ वस्तु नहीं होता। उपहार उसके द्वारा बताई गई कुछ खास बातें, उसके साथ बिताए गए कुछ खास पल और उसके द्वारा सिखाई गई कुछ सीख भी हो सकती हैं।

अक्सर हम सोचते हैं कि मौत सब कुछ खत्म कर देती है, पर सच तो यह है कि इंसान के जाने के बाद भी वह हमारी मदद कर सकता है—अपने साथ बिताए कुछ वक्तों द्वारा, अपनी सिखाई गई सीख द्वारा और अपनी बातों द्वारा।

कहानी सुनने के बाद मुझे समझ आया कि मौत कोई अंत नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए उम्मीद या मदद का रास्ता है। इस कहानी के बाद मैंने सीखा कि हमारे कर्म और हमारे विचार ही ऐसे उपहार हैं, जो हमारे बाद भी दूसरों की मदद कर सकते हैं।
धन्यवाद!
प्रिया पाल, कक्षा 8

Reflections Since 2021