Sunday, 21 September 2025

अच्छाई और बुराई - मनोज कुमार

 पशुओं में पाए जाने वाले निःस्वार्थ प्रेम, अपनी प्रजाति के प्रति सहिष्णुता और अपने बच्चों की सुरक्षा की प्रवृत्ति उनकी अच्छाई में शामिल होती है। जैसे, कई जानवर अपने झुंड में एक नैतिक आचार-संहिता का पालन करते हैं और बिना किसी पूर्वाग्रह के प्यार व आत्म-समर्पण प्रदर्शित करते हैं।

दूसरी ओर, शिकारियों से बचाव के लिए अपनी प्रवृत्ति का पालन करना, भोजन की तलाश करना और अपनी जरूरतों के लिए दूसरे जानवरों के साथ प्रतिस्पर्धा करना बुराई में शामिल हो सकता है।

निष्कर्ष – जंतुओं का आंतरिक जीवन उनकी शारीरिक और प्राकृतिक प्रवृत्तियों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो हमें बुराई लग सकता है। जैसे शिकार करना या प्रतिस्पर्धा करना उनके अस्तित्व के लिए आवश्यक हो सकता है। दूसरी ओर, उनका निःस्वार्थ प्रेम और अपने बच्चों की रक्षा करना उनकी अच्छाई को दर्शाता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि उनके आंतरिक जीवन को मानवीय नैतिकता (सही या गलत) के मापदंडों पर नहीं मापा जा सकता।

धन्यवाद।
मनोज कुमार
सनबीम ग्रामीण स्कूल

Wednesday, 17 September 2025

गुरु नानक देव जी की यात्राएँ – सत्य, सेवा और मानवता का मार्ग - Sakshi Pal

इस एपिसोड से मुझे अनुभव हुआ कि गुरु नानक देव जी की यात्राएँ केवल धार्मिक यात्राएँ नहीं थीं, बल्कि वे मानवता को जोड़ने का एक महान प्रयास थीं। उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जाकर लोगों को सत्य, प्रेम, समानता और सेवा का संदेश दिया। "Allegory – The Tapestry of Guru Nanak Travels" हमें सिखाता है कि गुरु नानक देव जी का जीवन केवल सिख धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा है।

एपिसोड 21 के माध्यम से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि गुरु नानक जी ने हर जगह अपनी शिक्षाओं से समाज में नई सोच पैदा की। उनकी यात्राएँ हमें सिखाती हैं कि इंसान को जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर जीवन जीना चाहिए।

मुझे लगता है कि इस प्रकार के कार्यक्रम हमें न केवल इतिहास और धर्म के बारे में ज्ञान देते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि आज के समय में हम गुरु नानक जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में कैसे अपनाएँ। उनकी शिक्षाएँ हमें सत्य बोलना, दूसरों की सेवा करना और ईश्वर पर विश्वास रखना सिखाती हैं।

इस कार्यक्रम को देखकर मेरे मन में यह भाव आया है कि हमें भी अपने जीवन में सरलता, सत्य और सेवा को महत्व देना चाहिए। अगर हम गुरु नानक देव जी के बताए हुए मार्ग पर चलें, तो समाज में शांति, प्रेम और भाईचारे का वातावरण बन सकता है।

Sakshi Pal
Arthur Foot Academy

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