Monday, 28 July 2025

GSA Calendar August 2025

Notice: There will be no Brewing Knowledge Friday on the 1st of August and the Saturday Masterclass on 2nd August 2025, as we’re away for SGEF 2025. Please visit us at the Scoonews Global Edfest, find out more at www.globaledfest.com

My Good School

3rd   August 2025
Amardeep Singh Screening of Allegory. The Tapestry of Guru Nanak’s Travels 
Episode - 20 गीन गुलदस्ता (रंग-बिरंगे फूलों का गुच्छा 

10th August 2025
Book Reading- The Inner Life of Animals
Book Reading
क्या आपका बच्चा दुनिया का सामना करने के लिए तैयार है?

17th  August 2025
Book Reading- The Door-To-Door Bookstore
Book Reading
क्या आपका बच्चा दुनिया का सामना करने के लिए तैयार है?

24th   August 2025
We aim to inspire young minds, helping them navigate their dreams and aspirations while embracing their goals.
The YES workshop with Shikha Agnihotri, founder of The Right Side Story

Book Reading- The Inner Life of Animals

31st August 2025
Book Reading- The Door-To-Door Bookstore 
Book Readingक्या आपका बच्चा दुनिया का सामना करने के लिए तैयार है?

The Teachers Academy

Brewing Knowledge Fridays at 5.30 PM: Book Reading with Sandeep Dutt:

  • What Did You Ask At School Today: A Handbook Of Child Learning; and 
  • The Book of Rumi: 105 Stories And Fables That Illumine Delight And Inform

Saturday Masterclass Webinar at 5:30 PMProductive Failure - Design for and turn your failures into meaningful learning experiences

GSA Squad Meetings

At 5:30 PM every Monday on Zoom - GSA Coordinators, Volunteers and Mentors. #JoyOfGiving We review programs and plan for the coming week.

Good Schools of India

Are you signed up for the Good Schools of India Weekly yet? Don't miss out on valuable insights—published every Monday at 7:00 AM! #JoyOfLearning Subscribe at: www.GSI.in

Sunday, 27 July 2025

एक ओंकार की गूंज: गुरु नानक देव जी की आत्मिक यात्रा - साक्षी पाल

"नाम जपो, सेवा करो, मानवता की राह पर चलो"

Episode 19 को देखकर मुझे यह महसूस हुआ कि गुरु नानक देव जी सिर्फ एक धार्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वे मानवता, एकता और सच्चाई के प्रतीक थे। उन्होंने अपनी यात्राओं के माध्यम से न सिर्फ़ लोगों को ईश्वर के बारे में बताया, बल्कि समाज में फैले भेदभाव, अंधविश्वास और झूठे रिवाजों को भी चुनौती दी। इस एपिसोड में दिखाए गए ऐतिहासिक स्थल, जो आज पाकिस्तान में स्थित हैं, यह दर्शाते हैं कि भले ही समय बदल गया है, पर गुरु जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है

"ना कोई हिन्दू, ना कोई मुस्लिम" — इस विचार के द्वारा उन्होंने धर्मों के बीच की दीवारें तोड़ी और इंसानियत को सबसे ऊपर रखा।

यह एपिसोड हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा धर्म वही है, जो प्रेम, सेवा और सच्चाई पर आधारित हो। गुरु जी ने सिखाया कि "ईश्वर मंदिर या मस्जिद में नहीं, बल्कि हर जीव में है।" आज की दुनिया में, जहाँ धर्म के नाम पर मतभेद और संघर्ष देखने को मिलते हैं, वहाँ गुरु नानक देव जी का Universal संदेश एक प्रकाशपुंज की तरह है।यह एपिसोड केवल इतिहास नहीं दिखाता, बल्कि आत्मा को भी छूता है। यह मात्र एक दृश्य यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा थी।

"वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह!"
"जहां एक ओंकार की गूंज हो, वहां नफ़रत की कोई जगह नहीं होती!"

– साक्षी पाल





विनम्रता की छाप: गुरु नानक जी की शिक्षाओं से जीवन का मार्ग - साक्षी खन्ना

 

"अच्छा प्रभाव", अर्थात विनम्रता की छाप, एक ऐसा विषय है जो सीधे हमारे हृदय और व्यवहार से जुड़ा है। इस एपिसोड को सुनकर यह स्पष्ट हो गया कि गुरु नानक देव जी की यात्राएँ केवल शारीरिक नहीं थीं, बल्कि वे आत्मा की यात्रा और मानवता के मार्गदर्शन का प्रतीक थीं। गुरु नानक देव जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा बल दिखावे में नहीं, बल्कि विनम्रता में होता है। जब इंसान अपने ज्ञान, पद या सफलता के कारण अहंकार में डूब जाता है, तब वह दूसरों से दूर हो जाता है। लेकिन जो व्यक्ति विनम्र होता है, वह सभी के दिलों में स्थान बना लेता है।

अमरदीप सिंह जी ने जब गुरु नानक जी के व्यवहार और उनके सच्चे प्रेम को साझा किया, तब मुझे यह समझ आया कि आज के समय में भी विनम्रता कितनी आवश्यक है। विनम्रता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि यह एक ऐसा गुण है जो व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। यह हमें सुनना सिखाती है, समझना सिखाती है और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाती है।

मेरे मन के विचार:

इस एपिसोड ने मुझे स्वयं के विचारों पर सोचने के लिए प्रेरित किया।
क्या मैं भी इतनी विनम्र हूं कि हर किसी को आदरपूर्वक सुन सकूं?
क्या मैं अपने शब्दों और कर्मों से दूसरों को सम्मान दे पाती हूं?
यह सत्र मेरे लिए एक आईने की तरह था, जिसमें मैंने खुद को देखा — और यह जाना कि मुझे स्वयं को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ समय की सीमाओं से परे हैं।
आज भी यदि हम उनके बताए मार्ग — सेवा, विनम्रता और सच्चाई — पर चलें, तो हमारा जीवन न केवल सुंदर और शांतिपूर्ण, बल्कि सार्थक भी बन सकता है।

निष्कर्ष:

विनम्र प्रभाव केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। इसे अपनाकर हम समाज में प्रेम, सहिष्णुता और शांति का संचार कर सकते हैं। इस एपिसोड ने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ी — जो मुझे सदा याद दिलाएगी कि सच्चा इंसान वही है जिसमें विनम्रता हो।

"ईश्वर के सामने सब समान हैं — कोई ऊँचा-नीचा नहीं।"
इंसान को अपने अहंकार को त्यागकर विनम्र होना चाहिए।

"सेवा भाव से जीना — दूसरों की सेवा करना बिना किसी घमंड के — यही सच्ची भक्ति है।"

गुरु नानक देव जी ने बार-बार कहा कि —

ईश्वर के निकट वही पहुँच सकता है, जो अपने अहंकार को त्याग देता है।

— साक्षी खन्ना



संपूर्ण मानवता के गुरु: नानक की वाणी, नानक का प्रेम - Lalita pal

 

"He lit the flame of truth and grace, Guru Nanak showed the divine in every face."

यह एपिसोड गुरु नानक देव जी की यात्राओं के दौरान एक गहरे और प्रतीकात्मक अनुभव को दर्शाता है। यह न केवल ऐतिहासिक स्थलों को दिखाता है, बल्कि उन स्थलों में छिपे हुए आध्यात्मिक संदेशों को भी उजागर करता है।

गुरु नानक देव जी अपने उपदेशों में सदैव विनम्रता को प्राथमिकता देते थे। इस एपिसोड में दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने कठोर और घमंडी लोगों को भी प्रेम और शांति के माध्यम से बदल दिया।

गुरु नानक जी ने संसार को यह बताया कि ईश्वर एक है और वह हर जीव में समाया हुआ है। उनके इस विचार ने धार्मिक भेदभाव को मिटाने का मार्ग दिखाया। उन्होंने अमीर–गरीब, ऊँच–नीच, स्त्री–पुरुष — सभी को समान माना। जब दुनिया जात-पात में उलझी हुई थी, तब गुरु नानक देव जी ने सबको एक ही प्रभु की संतान बताया।

इस एपिसोड को देखने के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके संदेश आज की दुनिया में और भी अधिक प्रासंगिक हैं, जहाँ धर्म, भाषा और जाति के नाम पर भेदभाव बढ़ता जा रहा है।

गुरु नानक जी की विचारधारा हमें जोड़ने और प्रेम फैलाने की प्रेरणा देती है।

"नाम जपो, सच्चा पथ अपनाओ,
गुरु नानक जी की राह चलो, मोक्ष को पाओ।"

– ललिता पाल

विनम्रता की शक्ति: गुरु नानक जी की यात्राओं से सीख - रीना देवी

 

"विनम्रता की छाप" — यह शीर्षक स्वयं में बहुत गहराई लिए हुए है। इससे मैंने महसूस किया कि विनम्रता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक महान शक्ति है, जो किसी भी व्यक्ति को भीतर से बड़ा बनाती है। गुरु नानक जी की यात्रा केवल भौगोलिक नहीं थी, बल्कि यह आत्मा की यात्रा थी — ऐसी यात्रा जो सिखाती है कि विनम्रता से ही संसार जीता जा सकता है। यह एपिसोड हमें याद दिलाता है कि सच्चे प्रभाव की शुरुआत विनम्र हृदय से होती है। एक विनम्र व्यक्ति शब्दों से नहीं, अपने कर्मों से प्रभाव छोड़ता है। जब अमरदीप सिंह जी इस एपिसोड को साझा करते हैं, तो यह केवल सीख ही नहीं देता, बल्कि आत्मा को भी छू जाता है।

विनम्रता ऐसा गुण है, जो व्यक्ति को महान बनाता है — भले ही वह स्वयं को कभी महान न माने।
गुरु नानक जी की यात्रा में विनम्रता की छाप हर स्थान पर स्पष्ट दिखाई देती है। विनम्रता कोई दिखावे की चीज नहीं, यह आत्मा का स्वाभाविक गुण है। जब कोई व्यक्ति हज़ार उपलब्धियाँ प्राप्त करने के बाद भी सहज और सरल बना रहता है, तभी वह सच्चा विनम्र कहलाता है। गुरु नानक देव जी की यात्राएँ इसी बात का उदाहरण हैं — वे राजमहल में भी उतने ही विनम्र थे, जितने किसी गाँव के कच्चे घर में।

"विनम्रता वह आईना है जिसमें आत्मा की असली खूबसूरती दिखाई देती है।"

विनम्रता किसी भी व्यक्ति की सबसे सुंदर पहचान होती है। यह शब्दों से नहीं, व्यवहार से झलकती है।
गुरु नानक देव जी की यात्राएँ विनम्रता की जीवंत मिसाल हैं — जहाँ उन्होंने हर जाति और समाज को बराबरी और प्रेम का संदेश दिया।

"विनम्रता वह झरना है, जो नीचे बहता है, पर राह को जीवन देता है।"

जब हमारे मन से घमंड मिटता है, तभी सच्ची विनम्रता जन्म लेती है।
विनम्र व्यक्ति आलोचना में भी अवसर देखते हैं और प्रशंसा में भी विनय बनाए रखते हैं।

असली प्रभाव वही होता है, जो दिल में उतर जाए — बिना शोर, बिना घमंड।

"झुके हुए पेड़ फल देते हैं, और झुका हुआ मन शांति देता है।"

— रीना देवी

"विनम्रता की छाप" — गुरु नानक देव जी से सीखा जीवन का सार - स्वाति

 गुरु नानक देव जी के जीवन-यात्रा पर आधारित इस एपिसोड में "विनम्रता की छाप" विषय ने मेरे मन को बहुत गहराई से छुआ। अमरदीप सिंह जी के माध्यम से जब मैंने इस प्रसंग को सुना और देखा, तो मुझे यह महसूस हुआ कि विनम्रता केवल एक गुण नहीं, बल्कि एक शक्ति है—जो बिना शब्दों के भी दूसरों के दिल को छू जाती है।

गुरु नानक देव जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व और महानता तभी संभव है जब हम अपने अहंकार को त्यागकर, दूसरों की बातों को समझें, उनका सम्मान करें और सभी के साथ आदरपूर्वक व्यवहार करें

आज के समय में, जब हर कोई स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ में लगा है, यह एपिसोड हमें शांति, सच्चाई, और मानवता से भरे जीवन की ओर ले जाता है।
विनम्रता कोई दिखावा नहीं है, यह तो हमारे भीतर ही होती है — बस हमें खुद को पहचानने की आवश्यकता होती है। यही इंसान की असली सुंदरता है।

इस एपिसोड ने मेरे मन में एक विचार जगाया — अगर हम सभी अपने जीवन में थोड़ी-सी भी विनम्रता अपना लें, तो यह समाज और दुनिया एक सुंदर और शांतिपूर्ण स्थान बन सकती है।

यह एपिसोड केवल गुरु नानक देव जी के विचारों को जानने का माध्यम नहीं था, बल्कि उन्हें समझने और मनन करने का एक अवसर भी बना।

इस अनुभव से मैंने यह सीखा कि जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए झुकना ज़रूरी होता है — जैसे फलदार पेड़ हमेशा झुका होता है।
विनम्र व्यक्ति हर जगह स्वीकार किया जाता है, क्योंकि उसमें दूसरों को अपनाने की शक्ति होती है।
और सबसे बड़ी बात —
"विनम्रता की छाप शब्दों से नहीं, व्यवहार से झलकती है।"

 "विनम्रता एक सुगंध की तरह है, जो बिना दिखे हर दिल में जगह बना लेती है।" 

— स्वाति

ईश्वर हर दिशा में है: मक्का से श्रीलंका तक गुरु नानक जी का संदेश - रूबल कौर

 

गुरु नानक देव जी की यात्राएं और उनका सार्वभौमिक संदेश

गुरु नानक देव जी ने मक्का की यात्रा की थी। उनके साथ उनके शिष्य भाई मर्दाना भी थे, जो मुस्लिम थे और मक्का जाना चाहते थे। मक्का में गुरु नानक देव जी एक आरामगाह में लेट गए, और उनके पैर काबा की दिशा में थे। एक हाजी जियॉन ने जब गुरु नानक जी को इस प्रकार लेटे हुए देखा, तो उसने विरोध किया और नाराज़गी ज़ाहिर की। गुरु नानक देव जी ने शांति से उत्तर दिया कि वे थके हुए हैं और उन्हें नहीं पता कि काबा किस दिशा में है। उन्होंने जियॉन से कहा, "मेरे पैर उस दिशा में कर दो, जहाँ काबा नहीं है।"

जब जियॉन ने उनके पैर दूसरी दिशा में घुमाए, तो यह देखकर चकित रह गया कि काबा भी उसी दिशा में घूम गया। तभी उसे बोध हुआ कि ईश्वर हर दिशा में है, हर ओर, हर स्थान पर व्याप्त है। मक्का की यह यात्रा सिख इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है, जो गुरु नानक देव जी के सर्वधर्म समभाव, समानता, और ईश्वर की सर्वव्यापकता के संदेश को दर्शाती है। गुरु नानक देव जी ने अपनी पहली यात्रा के दौरान पटना का दौरा भी किया था। यह यात्रा 16वीं शताब्दी की शुरुआत में हुई, जब वे पूर्व दिशा की ओर यात्रा कर रहे थे। पटना में उन्होंने पश्चिम द्वार से प्रवेश किया।

गुरु नानक देव जी ने कई देशों और क्षेत्रों की यात्राएं कीं, जिनमें श्रीलंका भी शामिल था। उन्होंने वहां सिख धर्म और उसके मूल संदेशों का प्रचार किया। उनकी श्रीलंका यात्रा का वहां के लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, उन्होंने श्रीलंका के नागपट्टनम, जाफना, नयिनतिवु, त्रिंकोमाली, बट्टीकलोआ आदि स्थानों का दौरा किया। श्रीलंका यात्रा के दौरान राजा शिवनाथ से भी उनकी मुलाकात का उल्लेख मिलता है।

यह यात्रा गुरु नानक देव जी के जीवन और सिख धर्म के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

"God is one but He has innumerable forms. He is the creator of all and He Himself takes human form."

रूबल कौर

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