हमारी हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ की यात्रा। - Hindi Podcast

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हमारी हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ की यात्रा।

Vani: "ॐ नमः शिवाय गुरुवे सच्चिदानन्द मुर्तये निस्प्रपञ्चाय शान्ताय निरालम्बया तेजसे"।

अर्थ - गुरु सभी का आत्म है, सत्य, ज्ञान और आनंद का अवतार है। जो संसार से परे, शान्त, स्वतंत्र और दीप्तिमान हैं, उन्हें नमस्कार है।

Yashraj : माय गुड स्कूल में एक साल वास्तव में तेजी से बीत गया है जो हमारे हिंदी सत्र का भी अंत करता है। इस सत्र का हिस्सा बनकर हमें बहुत खुशी हुई, इसलिए मैं यशराज।

Vani: और मैं वाणी ।

Yashraj:  हिंदी के सत्रों की यात्रा के बारे में इस पॉडकास्ट की मेजबानी करने के लिए यहां हैं। लेकिन, क्या आपको नहीं लगता कि इस पॉडकास्ट को और अधिक रोचक बनाने के लिए हमें अपने कुछ और जॉली इंटर्न की आवश्यकता होगी?

Vani: सच में, इसलिए मैं अपने दोस्तों और इंटर्न- रिशोना, शांभवी, आरफा,और संदीप सर को आमंत्रित करती हूं।

Yashraj: रिशोना, शांभवी और आरफा, कृपया हमारे साथ हिंदी सत्र के अपने विचार और अनुभव साझा करें।

Rishona: हां, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि हमारी हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ की यात्रा वास्तव में कुछ और थी! तोत्तो-चान और स्वामी से अंग्रेजी सत्र में, मैंने बहुत कुछ सीखा है, मुझे लगता है कि बोलू, स्वामी और तोत्तो-चान सबसे अच्छे दोस्त हैं। यह इत्तेफाक ही है कि हम तीनों दोस्तों की कहानियां पढ़ते हैं। जैसा कि हम अध्याय या बल्कि रोमांच से गुजरे तो यह बहुत ताज़ा महसूस हुआ।

Shambhavi: इस सत्र में हरी घास की चप्पल वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ जैसी अदभुत किताब पढ़ना, असल में एक बहुत नए अनुभव के जैसा था जिसने हमे एक नया नज़रिया दीया। इस किताब ने हमें एक और बहुत ही अच्छे दोस्तों के समाहार से परिचित करवाया।

Arfa: हमारी हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाढ़ को पड़ने में अलग ही मज़ा था।कल्पना की इस बनावट में एक ताज़गी और नयापन है।उपन्यास में बच्चों के सपनों की दुनिया जैसी खूबसूरत चीजें हैं। भाषा की चमक के साथ-साथ भाषा का संगीत भी कहानी को आकर्षक बनाता है। भाषा की आन्तरिक रचना आख्यान के साथ-साथ वर्तमान के बोध को सजीव करती है।

Vani: धन्यवाद रिशोना, शांभवी और आरफा ,आपसे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। अब में हमारे गुरूजी संदीप सर को दो शब्द कहने के लिए आमंत्रित करना चाहूंगा। Yashraj: हमेशा हमारे प्रेरणा स्त्रोत बनने के लिए और हमारा मनोबल ऊँचा  रखने के लिए धन्यवाद सर ! अब, हमारे लिए कुछ शब्द कहने के लिए जुगजीव सर को आमंत्रित करते हैं। वह एक अंग्रेजी शिक्षक हैं जिन्होंने उत्साहपूर्वक हिंदी सत्रों में भाग लिया है। मैं महोदय से अनुरोध करूंगा कि आप जिन कुछ यादगार हिंदी सत्रों में शामिल हुए हैं, उनके अपने अनुभव कृपया साझा करें।

Vani: आपकी ये बातें निश्चय ही सत्य हैं। तुम्हारे बारे में क्या, यशराज? एक सक्रिय हिंदी JOL इंटर्न होने के नाते और हर सत्र में भाग लेने का आपका सफर कैसा रहा?

Yashraj: मैंने अंग्रेजी की तो बहुत सी किताबें बचपन से पढ़ी हैं, लेकिन हिंदी की किताबों श को बहुत ज्यादा नहीं पढ़ा था। परंतु पिछले 1 साल में माय गुड स्कूल के माध्यम से मैंने हिंदी की कहानियां भी पढ़नी शुरू की, जिससे मेरी रुचि हिंदी की किताबों में भी बढ़ गई है। और साथ ही साथ मेरी हिंदी शब्दावली में भी सुधार हुआ है। अब मुझे हिंदी भी रोचक लगने लगी है।हमने जो यह उपन्यास हरे घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बोना पहाड़ पढ़ा है,उससे मुझे बहुत से लोक भाषा के शब्दों का भी ज्ञान हुआ है। साथ ही साथ हमने समय-समय पर उपन्यास पर आधारित प्रश्नावली आयोजित की जिससे हमारा हिंदी पठन और रोचक और ज्ञानवर्धक हुआ।आपका क्या कहना है वाणी?

Vani: हिंदी सत्रों का हिस्सा बनना मेरे लिए हमेशा बहुत खुशी की बात रही है। और इस अद्भुत किताब को पढ़ना - हरे गैस की छप्पर वाली झोपड़ी और बोना पहाड़, निश्चित रूप से मुझे अपने बचपन में वापस ले जाता है और मेरी प्यारी यादों से जुड़ता है। जब मैं किताब के पन्ने पढ़ती थी तो अपने आप एक किरदार में बदल जाती था। मेरी पसंदीदा कूना थी- एक प्यारी लेकिन मजबूत छोटी लड़की।हिंदी सत्र ने अन्यथा मेरे हिंदी पढ़ने के कौशल और हिंदी में मेरी रुचि में भी सुधार किया है। Yashraj: इसके साथ ही हम अपने पॉडकास्ट के अंत में आ गए हैं। नीचे कमेंट करें और हमें बताएं कि क्या आपको हमारा पॉडकास्ट पसंद आया। आज हमारे तरफ से बस इतना ही। ट्यूनिंग के लिए धन्यवाद।



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Thank you, Anvesha Rana and students, from Gyanshree and Ahlcon Public Schools.

Please find out more about My Good School at www.MyGoodSchool.in.

Thank you to the author of the book Ashok K Shukla and his publisher Rajkamal Prakashan. Above all, we are grateful to Ms Chandra Prabha from Gyanshree School for recommending the book.


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