"Our goal is our greatest strength, giving us the courage to face every challenge."
लक्ष्य के बिना जीवन की दिशा निर्धारित करना बहुत मुश्किल है। अगर हमने अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित नहीं किया तो हम अपनी मंज़िल को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए सबसे पहले हमें अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। लक्ष्य हमें दिशा देता है, जैसे घने अंधेरे में दीपक की छोटी-सी लौ हमें राह दिखाती है।
बिना लक्ष्य के जीवन ऐसा है जैसे नाव के बिना पतवार, जो लहरों के सहारे इधर-उधर भटकती रहती है। जब कभी हम अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने की कोशिश करते हैं तो कठिनाइयाँ, असफलताएँ और बहुत सारी रुकावटें आती हैं और हम घबरा जाते हैं। लेकिन वही मुश्किलें हमें मज़बूत बनाती हैं और सफलता की कीमत समझाती हैं।
अगर हम अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि हमने अपने सपनों के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया है। अगर हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक कदम बढ़ाते हैं तो हज़ारों मुश्किलें सामने आती हैं, जो हमें पीछे की ओर खींचने लगती हैं। लेकिन अगर हम पीछे हट जाएँ तो वह हमारी हार है, और अगर हर मुश्किल को पार करके आगे बढ़ जाते हैं तो जीत पक्की है।
ज़िंदगी एक किताब की तरह है; हर दिन एक नया पन्ना खुलता है और नई मुश्किलें सामने आती हैं, जिन पर हम अपने कर्मों और विचारों से लिखते जाते हैं। कभी-कभी ज़िंदगी में दुख के इतने काले बादल छा जाते हैं कि लगता है शायद कभी खत्म नहीं होंगे, लेकिन यह जीवन का सत्य है कि रात के बाद सुबह और दिन के बाद फिर से रात आती है।
अगर किसी भी व्यक्ति के पास कोई लक्ष्य नहीं होता, तो वह इस जीवन में चलता ही रहता है। जैसे कोई यात्री यात्रा तो करता है लेकिन अपनी मंज़िल को नहीं जानता, इसलिए बस चलता ही रहता है। लेकिन अगर अपनी मंज़िल का पता चल जाए, तो फिर वह सीधे अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है।
जैसे एक चींटी बार-बार चट्टान पर चढ़ती है और गिरती है, लेकिन हार नहीं मानती क्योंकि उसने अपना लक्ष्य निर्धारित कर रखा है, इसलिए वह अंततः अपनी मंज़िल तक पहुँच जाती है। जब तक हम अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं करते, तब तक समय भी व्यर्थ जाता है, मुश्किलें भी बढ़ती हैं और इंसान भटकता ही रहता है। हाँ, जिस दिन हमें अपने लक्ष्य का ज्ञान हो जाएगा, उसी दिन से ज़िंदगी को सही रास्ता मिल जाएगा।
"Only those who don't fear challenges but stay determined at every step."
- Lalita Pal, Arthur Foot Academy
No comments:
Post a Comment